Sunday, October 25th, 2026

2500 से ज्यादा अनुकंपा नियुक्तियां लंबित, दफ्तरों पर काम का बोझ

भोपाल
प्रदेश में पहले से रिक्त पदों पर अधिकारियों व कर्मचारियों की भर्ती नहीं किए जाने, कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने व हर माह रिटायर होने वाले करीब 12 सौ अधिकारियों कर्मचारियों की कमी के चलते सरकारी दफ्तरों का सिस्टम गड़बड़ा गया है। इस बेपटरी होते सिस्टम में सुधार के लिए समय पर कवायद नहीं हुई तो आने वाले महीनों में सरकार को काम चलाने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर निर्भर रहना होगा। ऐसे में जहां सरकार की जनसुविधाओं वाली योजनाओं पर असर पड़ेगा वहीं गंभीर मामलों में गोपनीयता प्रभावित होने का खतरा भी बन सकता है।

मार्च 2021 में कोरोना की दूसरी लहर में दिवंगत कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री कोविड 19 अनुकम्पा नियुक्ति योजना और मुख्यमंत्री कोविड 19 विशेष अनुग्रह योजना शुरू करने के बाद सरकार के पास 2517 आवेदन नौकरी और आर्थिक सहायता के लिए पहुंचे हैं। साथ ही कर्मचारियों के रिटायरमेंट के कारण जिलों और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में सरकार के कामकाज गड़बड़ाने लगा है। सरकार की तमाम कोशिश के बाद भी लोगों को समय पर सेवा मिलने में दिक्कतें आने लगी हैं। मार्च 2021 से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति भी लगातार हो रही है। मार्च में ही करीब 20 हजार कर्मचारी रिटायर हुए हैं। इसके अलावा हर माह औसत 1200 कर्मचारी प्रदेश भर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उधर कोविड 19 अनुकम्पा नियुक्ति और विशेष अनुग्रह योजना के ही अब तक आए आवेदनों में से करीब दो हजार जिला स्तर पर ही पेंडिंग हैं।

कोविड 19 विशेष अनुग्रह योजना में आए आवेदनों के आधार पर यह पता चलता है कि सबसे अधिक 65 कर्मचारी बालाघाट में दिवंगत हुए हैं। धार में 55, इंदौर में 50, भोपाल में 45, छिंदवाड़ा व सागर में 32-32, सिवनी में 31 समेत कुल 956 आवेदन आए हैं। इसमें से 772 आवेदन पर अभी कार्यवाही नहीं हो सकी है। विभागवार रिपोर्ट से पता चलता है कि स्कूल शिक्षा विभाग के 411, आदिम जाति कल्याण विभाग के 165, वन विभाग के 42 कर्मचारी दिवंगत हुए हैं जो शासकीय सेवा में नियमित नहीं थे। दूसरी ओर अनुकम्पा नियुक्ति योजना के आवेदनों से पता चलता है कि भोपाल में 110, धार में 93, खरगोन में 64, बड़वानी में 59,  छिंदवाड़ा में 56, बालाघाट में 52, इंदौर व सिवनी में 49-49, जबलपुर में 47, सागर व झाबुआ में 45- 45 शासकीय कर्मचारियों अधिकारियों समेत कुल 1561 की मौत की पुष्टि आधिकारिक तौर पर हो चुकी है। इस योजना में विभागवार रिपोर्ट से पता चलता है कि स्कूल शिक्षा विभाग के 497, आदिम जाति कल्याण विभाग के 262,जल संसाधन विभाग के 93, वन विभाग के 75, लोक निर्माण विभाग के 59, उच्च शिक्षा विभाग के 52 समेत 1561 अधिकारियों कर्मचारियों को कोरोना की दूसरी लहर ने लील लिया है। सरकार के सभी विभागों में इनमें से 1190 दिवंगतों के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल सकी है।

सरकार में घटते अफसरों कर्मचारियों के कारण स्थिति यह है कि अस्सी हजार से अधिक पद रिक्त हैं। इसमें पचास हजार कर्मचारियों की तत्काल जरूरत है जिसकी तीन साल से अधिक समय से भर्ती नहीं हो पाने के कारण भरपाई नहीं हो पा रही है। मुख्यमंत्री इसको लेकर बैठक ले चुके हैं और भर्ती के लिए निर्देश दे चुके हैं पर इस पर प्रगति नहीं हो रही है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के पदों पर भर्ती इस अवधि में हुई है। इसके अलावा राजस्व, गृह, जेल, शिक्षा विभाग में रिक्त 35 हजार से अधिक पदों की भर्ती नहीं होने से आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। एससी एसटी के 20 हजार से अधिक पद रिक्त हैं।

 

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Source : Agency

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