मिशन टेक्नोलॉजी: पुलिसिंग को स्मार्ट और ऑफिसर्स को बनाएंगे एक्सपर्ट
भोपाल
मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग को तकनीकी रूप से सक्षम और उपयोगी बनाने के लिए राज्य सरकार पुलिस टेक्नोलॉजी मिशन बनाएगी। अपर मुख्य सचिव गृह राजेश राजौरा इस मिशन के अध्यक्ष होंगे। इसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वित्त, मैप आईटी और पुलिस के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
मंत्रियों के बाद राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संतोष ने कुछ जिलों के अध्यक्ष और प्रभारियों की भी बैठक ली। इन नेताओं को सुबह ही मीटिंग के लिए बुला लिया गया था और मंत्रियों की बैठक खत्म होने तक ये सभाकक्ष में बैठक शुरू होने का इंतजार करते रहे। बाद में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संतोष ने इनसे भी संगठन विस्तार पर चर्चा की और इनके कामकाज का ब्यौरा तलब किया।
प्रदेश में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राष्टÑीय और अंतर्राष्टÑीय स्तर पर उपयोग की जा रही तकनीक का राज्य में उपयोग करने, मध्यप्रदेश के भौगोलिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली पुलिस अफसरों के लिए नई तकनीक तैयार करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक पुलिस टेक्नोलॉजी मिशन का गठन करने जा रही है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित होने वाले इस मिशन में वित्त विभाग के प्रमुख सचिव मनोज गोविल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर, मैप आईटी के नामांकित अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं, टेलीकॉम, सायबर,एससीआरबी, पीटीआरआई इसके सदस्य होंगे। यह मिशन भविष्य में पुलिस विभाग को तकनीकी रूप से सक्षम एवं उपयोगी बनाने पर विचार करेगा।
मैप आईटी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान मिलकर इसके लिए तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराएंगे। वित्त विभाग इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा। वहीं पुलिस विभाग में सायबर विशेषज्ञ, एससीआरबी और पीटीआरआई से जुड़े पुलिस अफसर तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं मिलकर यह तय करेंगे कि प्रदेश के किस क्षेत्र में किस तरह के अपराध अधिक है और वहां अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए किस तरह की तकनीक की जरुरत है उसके लिए क्या संसाधन और जुटाए जाने चाहिए।
राज्य सरकार काउंटर ड्रोन नीति भी बनाएगी। इसके जरिए जिला स्तर पर एवं थाना स्तर पर ड्रोन संबंधी नॉलेज बैंक का निर्माण किया जाएगा। ड्रोन के जरिए होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के प्रावधान भी इस नीति में किए जाएंगे। नागरिकों के माध्यम से हानिकारक ड्रोनों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए एप तैयार किया जाएगा। इस एप के जरिए ऐसे हानिकारक ड्रोन के बारे में रियल टाईम जानकारी मिल सकेगी। स्वदेशी किफायती लागत का पता लगाने और बेअसर करने की क्षमताओं पर ठोस अनुसंधान और विकास के काम भी किए जाएंगे। ड्रोन तकनीक की प्रगति को समझने के उद्देश्य से इनहाउस एक्सपर्ट ग्रुप का निर्माण किया जाएगा। ड्रोन संबंधी घटनाओं का विधिक दायित्व भी तय किया जाएगा। स्टेक होल्डर्स के बीच प्रक्रिया संबंधी जागरुकता फैलाई जाएगी।

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