मंत्री जी, गोबर बरसात के पहले बहा या बाद में
रायपुर
सदन में प्रश्नकाल के दौरान गोबर की कमी, चोरी होने और पानी में गोबर बह जाने का मामला नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि अिब तक कितनी कि गोबर खरीदी की गई और कितनी की बिक्री की की गई। जवाब में मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि 97 करोड़ रुपये के गोबर खरीदी गयी, जिसकी तुलना में कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट के बिक्रय के जरिये 54 करोड़ की राशि की आमदनी हुई।
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने गोठानों से गोबर के चोरी होने और बह जाने की सूचनाओं से जुड़े सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि इन सूचनाओं पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है। जवाब में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया, प्रदेश भर में 4 गोबर खरीदी केंद्रों से गोबर चोरी होने और पानी में बह जाने की शिकायत मिली थी। उन्होंने बताया, दुर्ग में अगस्त 2020 में भारी बरसात से गोबर बह जाने की शिकायत मिली थी, इसकी वसूली के लिए नोटिस जारी हुआ है। कोरबा से गोबर चोरी की रिपोर्ट मिली है। घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इस जवाब में विपक्ष ने इन घटनाओं को घोटाला बताया।
इसके तुरंत बाद धरमलाल कौशिक ने पूछा कि राज्य में कितने गोठान स्वालंबी हो चुके हैं। जवाब में मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि प्रदेश के 11 हजार ग्राम पंचायत में गोठान बन रहा है। इनमें से 5585 गोठान सीधे गोबर की खरीदी करते हैं और 1000 से ज्यादा गोठान आत्मनिर्भर हो चुके हैं। जिसके बाद मंत्री रविंद्र चौबे ने सदन में यह बताया कि, एक हजार गौठान पूरी तरह तैयार है, इस पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा मुझे एक हजार गौठान की सुची दे दीजिएगा।
भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने पूछा कि गोबर की खरीदी और सुरक्षा कौन करता है। कृषि मंत्री ने बताया, गोठान पंचायतों की संपत्ति है। वहां गोबर गोठान संचालन समितियां बनाई गई हैं, ये गोबर खरीदी और गोठान की गतिविधियों का संचालन करती है। पंचायत और कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इसमें उनकी मदद करते हैं। भाजपा नेताओं ने पूछा कि क्या गोठान समितियों की नियुक्ति पंचायतों ने की है। जवाब में मंत्री ने कहा, पंचायतों की सलाह पर बनी हैं। इसपर विपक्ष भड़क उठा। भाजपा विधायकों ने कहा, पंचायतों से 50-50 नाम मांगे गए थे, लेकिन उनमें से किसी को भी समिति में नहीं लिया गया। यह पंचायतों के अधिकार का अतिक्रमण है। उसके बाद भाजपा के विधायक अपनी सीट पर खड़े होकर हंगामा करने लगे। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

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