Monday, October 19th, 2026

मल्लखम्ब होगा खेलो इंडिया यूथ गेम्स में मुख्य आकर्षण, पहली बार आयोजित हो रही स्पर्धा, 240 खिलाड़ी लेंगे भाग

चंडीगढ़
पंचकूला में आयोजित होने जा रही खेलो इंडिया यूथ गेम्स के इस संस्करण में पहली बार खेली जा रही स्पर्धा- मल्लखम्ब मुख्य आर्कषण होगा। ‘पुअर मैन्स स्पोटर्स‘ से प्रचलित यह स्पर्धा अभी तक ग्रामीण दायरे तक ही सीमित थी लेकिन इस संस्करण में इस स्पर्धा को नया आयाम दिया जा रहा है। इस स्पर्धा में 16 प्रदेशों से लगभग 240 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

पदक धारकों की प्रतिमाह 10 हजार रुपये स्कालरशिप तय
केन्द्रीय युवा मामलों और खेल मंत्रालय ने इस स्पर्धा की नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन गठित कर इस खेल को और अधिक लोकप्रिय बनाने की प्रयास किया है। मल्लखम्ब फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश इंदोलिया के अनुसार गत वर्षो में इस खेल की नेशनल स्तर की प्रतियोगिता आयोजित कर नए आयाम स्थापित किए गए हैं और पदक धारकों की प्रतिमाह दस हजार रुपये स्कालरशिप तय की है।

मल्लखम्ब का गौरवमयी इतिहास
इंदोलिया ने बताया कि इससे पूर्व शीर्ष मल्लखम्ब खिलाड़ी बिना अवसरों की कमी के कारण अकसर स्ट्रीट परफोरमर या सर्कस कलाकार के रुप में अपना कैरियर समाप्त कर देते हैं। उन्होंने बताया कि वास्तव में, रियलिटी शो में उनके जबरदस्त कलाबाजी को देखने के बाद, लोग सोचते हैं कि यह केवल एक डेमोस्ट्रेशन स्पोटर्स है। बावजूद इसके मल्लखम्ब का एक गौरवमयी इतिहास है, जिसका जन्म भारत में हुआ।

संस्कृत क्लासिक मानसोल्लासा में मिलता है खेल का उल्लेख
रानी झांसी, तात्या टोपे और क्रांतिकारी राजगुरु, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने गुरिल्ला वारफेयर में अंग्रेजों के खिलाफ बखूबी उपयोग किया। प्राचीन काल में इसका उल्लेख संस्कृत क्लासिक मानसोल्लासा में मिलता है जिसे वर्ष 1135 में चालुक्य वंश के राजा सोमेश्वर तृतीय ने लिखा था। मराठा अपने सैनिकों के लिए इस कला को स्टेमिना बढ़ाने के लिए उपयोग में लाते रहे। इसके बाद पेशवा बाजी राव द्वितीय के गुरु बालमभट्टा दादा दियोधर ने इस खेल को नया जीवन दिया।

समृद्ध विरासत के बावजूद खेल ने देखे उतार चढ़ाव
समृद्ध विरासत के बावजूद इस खेल ने बहुत उतार चढ़ाव देखे। अखाड़ों में यह खेल गुरु शिष्य परम्परा के चलते जीवित रहा। देश भर में 100 व्यायामशाला केन्द्रों और ऐकेडमियों में कोचिस और वालिंटियर्स ने अब तक जीवित रखा है। इस पारम्परिक कला को माडर्न स्पोर्ट्स इवेंट में जिमनास्टिक की तर्ज पर प्रत्येक खिलाड़ी को दस प्वाईंटों के आधार पर आंका जाता है। इस खेल की लोकप्रियता का आंकलन इसी से होता है कि इसे भारत के साथ विश्व के 45 देशों में स्पोर्ट्स के रुप में अपनाया गया है।

 

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Source : Agency

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