महाकाल की 7वीं शाही सवारी,केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने किया अभिषेक
उज्जैन
भगवान महाकाल की शाही सवारी शाम 4 बजे शुरू हो गई है। सवारी यहां से रामघाट पहुंची। यहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जलाभिषेक किया। इसके बाद सवारी हरसिद्धि मंदिर पहुंची। यहां शिव-शक्ति का मिलन हुआ। यहां से सवारी वापस महाकाल मंदिर की ओर प्रस्थान कर गई है। भगवान महाकाल मन महेश व चंद्रमौलेश्वर रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सवारी में चुनिंदा लोग ही मौजूद हैं। तय मार्ग से निकलकर सवारी वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। सवारी निकलने से पहले भगवान महाकाल की पूजा-श्रंगार व आरती की गई।
शाही सवारी के मौके पर पारंपरिक उद्घोषक, तोपची, सलामी गार्ड, घुड़सवार दल, संगीतमय धुन के साथ पुलिस बैंड, पुराने युग का आभास कराती नगाड़ों की थाप, गूंजती शहनाई, पुजारी, पुरोहित और अधिकारी आदि सवारी के साथ चल रहे हैं। सवारी में भक्तों के शामिल होने की अनुमति नहीं है।
भगवान महाकाल के चौबदार यानि अंगरक्षक) के उद्घोष के साथ शाम चार बजे ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से अवंतिकानाथ की शाही सवारी आरंभ हुई। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए इस बार भी सवारी में भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है।
रथ पर सवार पांच रूप
श्रावण-भादौ मास की सात सवारियों में से आखिरी शाही सवारी पर भक्तों ने भगवान महाकाल के इन पाचं मुखारविंद के दर्शन हो रहे हैं। सुसज्जित रथ पर भगवान महाकाल के शिव तांडव, उमा महेश घटाटोप, सप्तधान तथा होल्कर मुखारविंद विराजित कर भक्तों के दर्शनार्थ निकाले गए हैं।
शाही सवारी के लिए तीर्थपुरी अवंतिका को सजाया गया है। महाकाल मंदिर के गर्भगृह से लेकर शिप्रा तट तक का संपूर्ण मार्ग लता, पता व फूलों से आच्छादित करने के साथ ही तोरणद्वार, वंदनवार तथा फूलों व रंगोली से शोभायमान सवारी मार्ग पर रंगबिरंगी छत्रियां व ध्वजाएं भी लहरा रही हैं।
सवारी मार्ग
महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा, झालरिया मठ के रास्ते सिद्ध आश्रम के समाने से होते हुए शिप्रा तट पर पहुंचेगी। यहां महाकाल पेढ़ी पर पुजारी भगवान का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करेंगे। पूजन पश्चात सवारी रामानुजकोट के समाने से हरसिद्धि की पाल होते हुए हरसिद्धि मंदिर पहुंचेगी। यहां शिव शक्ति मिलन कराया जाएगा। इसके बाद सवारी हरसिद्धि चौराहा होते हुए शाम पुन: महाकाल मंदिर पहुंचेगी। कोविड के कारण सवारी रूट छोटा किया गया है। 2019 तक सवारी गोपाल मंदिर होते हुए निकाली जाती थी।

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