Tuesday, October 20th, 2026

काव्‍य गोष्‍ठी में बिखरी दीपोत्‍सव की रोशनी

जबलपुर
 चांद की शीतलता मन को लुभाती है। चांद जब हमारे आंगन में उतरता है तो पूरा वातावरण चांदनी सा खिल उठता है। दीपक का प्रकाश और चांद दोनों ही सौंदर्य और आकर्षण का प्रतीक है। एक अकेला दीपक भी घने से घने अंधियारे को दूर करके प्रकाश फैलाता है तो वहीं दूसरी ओर चांद भी पूरी दुनिया को अंधेरी रात में रोशन करता है। कवियों के कुछ ऐसे ही काव्यात्मक मनोभावों को सुनने मिला अनेकांत द्वारा आयोजित आनलाइन काव्य गोष्ठी में। जहां दीपोत्सव के उपलक्ष में चांद हमारे अंगना उतरे विषय पर कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। जिसकी अध्‍यक्षता डॉ. हरिशंकर दुबे ने की। मुख्‍य वक्‍ता अतिथि राजेश पाठक प्रवीण, सारस्‍वत अतिथि अभिमन्‍यु जैन, माधुरी मिश्रा व संतोष नेमा थे। शुरुआत में स्‍वागत उद्बोधन देते हुए राजेंद्र मिश्रा ने विषय का प्रवर्तन किया। संस्‍थागत उद्बोधन राजें‍द्र रतन ने दिया। आशुतोष तिवारी के कुशल संचालन में काव्‍य गोष्‍ठी हुई। सरस्‍वती वंदना अर्चना गोस्‍वामी व आभार प्रमोद दाहिया ने ज्ञापित किया।


इन्‍होंने किया काव्‍य पाठ : काव्‍य गोष्‍ठी में चांद हमारे अंगना उतरे विषय पर प्रो. अरुणा पांडे, मनोज शुक्ला, आशुतोष तिवारी, कमलेश नाहटा, नारायण तिवारी, संतोष दुबे, आईपी गोस्वामी, प्रमोद दाहिया, मिथिलेश नायक, बसंत कुमार मिश्रा, महेश सोनी, माखन नगर, आशा जैन, निर्मला डोंगरे,सुषमा खरे, सुषमा सिंह कर्चुली, जी. एल. जैन, अनुराधा अनु, कुंजीलाल चक्रवर्ती , एड. सलपनाथ यादव प्रेम, प्रदीप नामदेव, प्रमोद तिवारी, रत्ना ओझा, डा. शरद नारायण खरे, यशोवर्धन पाठक ने काव्‍य पाठ किया। कवियों ने बताया कि एक रचनाकार के लिए उसकी रचना से महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता। दीपोत्सव पर हम सभी कवितों का दीपावली मिलन और खुशियां मनाने का यह काव्य पाठ सबसे बेहतर माध्यम रहा। जिसे सभी ने बहुत सराहा।

 

#दीपोत्‍सव की रोशनी

Source : Agency

पाठको की राय