Monday, October 19th, 2026

रवींद्र भवन में 70 मिनट की नृत्य नाटिका में दिखाएंगे संत रैदास का जीवन दर्शन

भोपाल
संस्कृति विभाग की ओर से प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी लोकरंग उत्सव 26 से 30 जनवरी तक रवींद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। इसमें देश की पांच घुमंतू जातियों की जीवनचर्या का दर्शाती प्रदर्शनी और 13वीं सदी के कवि संत रैदास की वाणी और उनके जीवन दर्शन को रेखांकित करती नृत्य नाटिका उत्सव का मुख्य आकर्षण होगी। रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर नृत्य नाटिका की प्रस्तुति 26 जनवरी की शाम को होगी।

जनजातीय संग्रहालय के संग्रहालय अध्यक्ष अशोक मिश्रा ने बताया कि, मुंबई के फिल्म और थिएटर अभिनेता गोविंद नामदेव कथावाचक (सूत्राधार) होंगे, जबकि राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता थिएटर अभिनेता रामचंद्र सिंह नृत्य नाटिका में संत रैदास की भूमिका निभाएंगे। संगीत निर्देशक के रूप में कोलकाता के सुमन साहा और जमशेदपुर (झारखंड) के कृष्णा राय द्वारा निर्देशित संत द्वारा लिखे गए लगभग 18 दुर्लभ गीत 70 मिनट के शो का हिस्सा होंगे। रैदास की दार्शनिक और आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाने के लिए सौ से अधिक कलाकार इसका प्रदर्शन करेंगे। संत रैदास जो पारंपरिक चमड़े का काम करने वाली जाति से थे और जिनके उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में बहुसंख्य अनुयायी हैं।रैदास ने जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी और एक ऐसे ईश्वर के पक्ष में खड़े हुए जो निराकार था।
 
रैदास के शिष्यों और पड़ोसियों की भूमिका निभाने के लिए शहर की झुग्गी बस्तियों से लगभग 30 लोगों को लिया गया है। शो की रहर्सल जनजातीय संग्रहालय में चल रही है। निर्देशक सुमन साहा ने कहा कि संत के सादा जीवन और उच्च विचार के आदर्श को ध्यान में रखते हुए, साज-सामान, वेशभूषा, प्रकाश व्यवस्था और संगीत सरल होगा। मालवी लोक नृत्य, कथक नृत्य और कुछ प्रयोगात्मक गतिविधियों का उपयोग किया गया है। रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा, मंच की थीम वाराणसी के घाट और मंदिरों पर आधारित हाेगी, जहां रैदास ने अपने जीवन का एक हिस्सा बिताया था।

यह भी होगा विशेष
27 से 29 जनवरी तक शाम 6.30 बजे से धरोहर के तहत नृत्य नाटिका के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी और ओडिशा के लोक और आदिवासी नृत्यों का मंचन किया जाएगा। देशांतर में ब्राजील, इटली, अमेरिका और अर्जेंटीना के नर्तक प्रस्तुति देंगे। पूर्वरंग में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लोक गीत शामिल होंगे। घुमंतू समुदाय में नट, जोगी, गड़िया, लोहार और रेवड़ी सहित खानाबदोश जनजातियों के पारंपरिक घर उनके दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली चीजों से परिपूर्ण होंगे, जो लोकरंग का एक और आकर्षण होंगे। उल्लास में बच्चों के लिए कठपुतली शो, मलखंभ, बहरूपिया और नाटक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। शिल्प मेले में हाथकरघा और हस्तशिल्प वस्तुओं का प्रदर्शन करने वाले लगभग तीन सौ स्टाल होंगे। स्वाद के तहत भवन परिसर में पारंपरिक जनजातीय और क्षेत्रीय व्यंजनों वाले लगभग 15 स्टाल भी लगाए जाएंगे।

 

#संत रैदास

Source : Agency

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