देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेस-वे से कितना होगा फायदा जानिए, क्या मिलेंगी सुविधाएं
लखनऊ शाहजहांपुर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज देश को सबसे लंबे एक्सप्रेस वे यानी गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करने आ रहे हैं। यह एक्सप्रेस वे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ से प्रयागराज तक 12 जिलों को जोड़ेगा। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं भी आसानी से मिल सकेंगी। गंगा एक्सप्रेस-वे पर नौ जनसुविधा केंद्र, सात रेलवे ओवर ब्रिज, 14 दीर्घ सेतु, 126 लघु सेतु और 381 अंडरपास बनाए जाएंगे। प्रवेश और निकासी के लिए 17 स्थानों पर इंटरचेंज सुविधा भी होगी। आस-पास के गांवों के लोगों के लिए सर्विस रोड बनाई जाएगी। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर की दूरी में 36 हजार 230 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्सप्रेस-वे को बनाया जाएगा, जिसका पीएम मोदी आज शाहजहांपुर के रोजा में शिलान्यास करेंगे।
खास बातें
- देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे देगा यूपी को ऊंचाइयां
- 12 जिलों को जोड़ेगा एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक, आर्थिक तरक्की को गति मिलेगी
- मेरठ में हापुड़ रोड पर बिजौली से गंगा एक्सप्रेस-वे शुरू होगा। हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजाहंपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ जिलों से होता हुआ प्रयागराज के सौरांव तक जाएगा।
- मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर में बनाया जाएगा गंगा एक्सप्रेस-वे
- 7386 हेक्टयर भूमि में 36 हजार 230 करोड़ रुपये से बनेगी एक्सप्रेस-वे
- देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे पर शाहजहांपुर में पांच हेलीपैड बनाए जाएंगे। साथ ही इस एक्सप्रेसवे पर सोलर पावर से ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा।
- गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर प्लांटेशन भी लगाया जाएगा।
यह फायदा होगा
- गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद सामाजिक और आर्थिक विकास होगा
- कृषि, वाणिज्य, पर्यटन और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
- पश्चिम से पूरब तक यातायात सुगम होगा
- हेलीपैड से एयर एम्बुलेंस जा सकेगी
- एक्सप्रेसवे पर ट्रामा सेंटर भी बनेंगे, इनसे संबंधित जिलों के गांवों को चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी
औद्योगिक कॉरिडोर के तौर पर होगा विकास
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे से विभिन्न औद्योगिक इकाइयों और यूपी के किसानों द्वारा किए गए उत्पादन को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर का भी विकास होगा। यह खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भंडार गृह, मंडी और दुग्ध आधारित उद्योगों की स्थापना की राह आसान करेगा।

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