ग्राम सभा का उत्तरदायित्व होना चाहिए, जो भी काम करें उसकी रिपोर्ट पूरी ग्रामसभा में दे-सिंहदेव
रायपुर/राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपना विशेष दखल रखने वाले टीएस सिह देव शाह राजघराने परिवार से ताल्लुक रखते हैं सबसे खास बात यह है कि जितने बड़े साम्राज्य और अरबों की मलकियत रखनेब वाले टीएस सिह देव उतने ही सौम्य व व्यक्तित्व के धनी है और प्रदेश की राजनीति मे विशेष दखल रखते है। 2013 से 2018 तक वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहे। वर्तमान में अंबिकापुर सीट से विधायक हैं, इस सीट से लगातार वे तीसरी बार विधायक चुने गये। 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का जन घोषणा पत्र तैयार कर सभी वर्गों का ध्यान अपनी ओर केंद्रित किया।
चुनाव के दौरान प्रदेश के लगभग हर वर्ग के लोगों से उन्होंने मुलाकात की और यही कारण रहा कि तैयार किया गया घोषणापत्र भाजपा सरकार के लिये मुसीबत का सबब बन गया और डॉ. रमन सिंह की सरकार मात्र 14 सीटों पर सिमट कर रह गयी ।
प्रश्न- कोविड-19 की तीसरी लहर से निपटने छत्तीसगढ़ प्रदेश कितना तैयार है?
टीएस - जितना पिछले अनुभव के आधार पर और फंड की उपलब्धता के आधार पर किया जा सकता है, उतनी हम तैयारी कर रहे हैं। इस बार शासन के वित्त विभाग से भी पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई है। केंद्र सरकार को भी जो प्रस्ताव दिया गया था वो करीब 600 करोड़ रुपए इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार से मिलने की संभावना है, तो अब आर्थिक कमी की बात नहीं रहेगी। परचेसिंग करना है वेंटीलेटर, इंफ्रास्ट्रक्चर, तैयार करना है आॅक्सीजन पाइप लाइन से बिस्तरों में उपलब्ध हो उसकी तैयारी करनी है। आॅक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लिक्विड आॅक्सीजन टैंक और सपोर्ट सिलेंडरों के मैनीफेस्ट के साथ अगर एक आॅक्सीजन बनाने की प्रक्रिया फेल हो गई तो दूसरी जगह से सप्लाई बाधित न हो उसके लिए मैंनीफोर्ट वगैरह बनाना जिसके लिए दोहरी तिहरी व्यवस्था की जा रही है। सभी मेडिकल कॉलेजों में जिला अस्पतालों में ब्लॉक लेवल तक यानी सीएचसी लेवल तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक भी 10 बिस्तरों सहित आॅक्सीजन के बिस्तर उपलब्ध होने चाहिए, जिसकी तैयारियां है। बच्चों की बात आती है, हालांकि इसमें कोई ऐसा कारण नहीं जिसमें कि बच्चों को ज्यादा होगा और बच्चे ज्यादा दिख सकते हैं, क्योंकि 18 से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीनेशन लग रहा हैं तो कोरोना के लक्षण गंभीर आए ना एक हजार कोरोना के लक्षण वाले मरीज अगर दिखते हैं तो बच्चे सौ दिखेंगे। अब 200 मरीज दिखेंगे उसमें बच्चे सौ दिखेंगे तो लगेगा बच्चे ही बच्चे बीमार हो रहे हैं, तो संख्या के अनुपात में बच्चों को ज्यादा करोना होने की बात मुझे नहीं लग रही है। प्रतिशत भले उनका ज्यादा दिखेगा, क्योंकि अधिकांश व्यस्क लोगों का टीकाकरण निरंतर चल रहा है और जितना ज्यादा लोग वैक्सीनेट होंगे उतना कम कोरोना का संक्रमण होगा।
छत्तीसगढ़ में दूसरी लहर ने प्रदेश के लोगों को कोरोना संक्रमण से ज्यादा प्रभावित किया था और वातावरण भी बड़ा दुखद रहा। दूसरी लहर में प्रदेश के नागरिकों ने दुख सहते हुए भी संयम और जागरूकता का परिचय दिया। नागरिकों ने जो सावधानियां बरती आज वही कारण है की संक्रमण दर में कमी आई है। छत्तीसगढ़ में मृत्यु दर भी कम हुआ है पिछले दिनों से आज तक की स्थिति की बात करते हैं, तो निश्चित रूप से मृत्यु दर और कोरोना के संक्रमण दर में कमी नजर आ रही है, हमें ज्यादा सावधान होने की आवश्यकता है, सोशल डिस्टेंस बनाना, हाथ साफ रखना, मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना, जब लोग बाहर जाएं और इसका पालन करें, तो किसी तीसरी, चौथी, पांचवी कई लहर हो सकती है, पर तीव्रता आने वाली लहरों की उतनी नहीं होनी चाहिए, जब तक कि कोई नया म्यूटिशन ना आ जाए। अभी न्यूजीलैंड की म्यूटेशन की बात हो रही है। अफ्रीका में अलग म्यूटीशन की बात हो रही है, तो इसका फैलाव अगर होता है और इसमें वैक्सीन का प्रभाव कम दिख रहा है, अगर ऐसी स्थिति आती है, तो ध्यान में हमको रखना है जल्दी से जल्दी और ज्यादा से ज्यादा वैक्सीनेशन हो और नागरिक अपने आप को सुरक्षित रखें। जितने कम लोगों के पास कोरोना पहुंचेगा, उतना कम मौका मिलेगा। कोरोना को नया स्वरूप धारण करने के लिए और नए म्यूटेशन का चांस नहीं मिलेगा। वैक्सीनेशन केंद्र सरकार उपलब्ध करवाएं, जितनी जल्दी हो सकता है। आसानी से देखेंगे तो कभी पच्चास हजार हो रहा है। कभी-कभी सवा लाख हो रहा है, डेढ़ लाख हो रहा है, जबकि क्षमता तीन लाख से पांच लाख लोगों को वैक्सीन लगाने की है, अभी नहीं हो पा रहा है। पर्याप्त मात्रा में केंद्र सरकार वैक्सीन समय पर उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। राज्य सरकार की क्षमता है, वैक्सिनेट करने की तो एक हिस्सा वैक्सीनेशन दूसरा हिस्सा एतिहात बरतना जो हर नागरिक के कर्तव्य के रूप में है। एक तरह से खुद के लिए परिवार के लिए और समाज के लिए भी आवश्यक है और तीसरा हिस्सा स्वास्थ विभाग के लिए भी है जिसकी निरंतर तैयारी चल रही है तो हम सब तैयार हैं तीनों फ्रंटलाइन के लिये।
प्रश्न- प्रदेश में निजी कोविड हॉस्पिटलों ने मनमानी फीस वसूली, मृत्यु दर भी ज्यादा रही, उन्होंने कोरोना महामारी को अवसर के रूप में इस्तेमाल किया, कितनो पर प्रदेश में कारवाही हुईं ?
टीएस - नियंत्रण के लिए सरकार ने रेट जारी कर रखा है, उससे ज्यादा नहीं लेना है यह दुर्भाग्यजनक पहलू है, हमारे समाज का शायद अन्य देश के समाजों में नहीं ऐसा हो मैं ऐसा मै नहीं कह सकता आपातकालीन स्थिति में हम देखते हैं कि कालाबाजारी होती है। प्याज, आलू का शॉर्टेज हो गया, तो रेट अनाप-शनाप बढ़ा दिया जाता है, उस परिस्थिति का का भी लाभ लेने की कुछ लोग की प्रवृत्ति रहती है। सभी प्राइवेट डॉक्टरों का तो मैं नहीं कहूंगा, लेकिन कहीं न कहीं से यह बात जरूर है और यह एक मानवीय पहल और डॉक्टर के रूप में भी यह जवाबदारी रहती है कि जो रेट तय हुए हैं। बात करके ही रेट तय होते हैं और जो रेट तय हुए हैं, उससे ज्यादा नहीं लेना चाहिए अगर लेते हैं तो जाच व कार्रवाई की जायेगी। कई मामले सामने भी आए सरकार ने इसकी जांच भी कराई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच भी की पैसे भी वापस दिलाए और कुछ केसेस में अस्पतालों के ऊपर केस भी किया और उनके रजिस्ट्रेशन को कैंसिल भी किया। कुछ अस्पताल बंद भी हुए। दो-तीन ऐसे अस्पताल भी हैं जिनको लाइसेंस अभी तक नही दिया गया।
प्रश्न- संविदा शिक्षक डॉक्टरों को कब तक नियमित किया जाएगा?
टीएस-अभी कोई पहल वैसी नहीं है। बहुत दिक्कत है, आती है, संविदा चिकित्सकों को शिक्षकों को रेगुलर करने में, क्योंकि जो रेगुलर स्टाफ होता है, जिनको प्रमोशन के चांस होते हैं, वह भी बीच में आपत्ति करते हैं। अपने प्रमोशन को लेकर और जो संविदा में है, हमारा प्रमोशन किसी कारण से बाधित था तो अब उनको लाभ नहीं मिलना चाहिए, जो संविदा में है वह कहते हैं जब कोई नहीं था तब हम कार्य कर रहे थे, तो हमको रेगुलर करिए, ऐसी परिस्थिति बनती है, जो प्रमोशन बाधित होने का कारण है, जैसे कई एमडी है, एमडीएमएस है, उनकी भी भर्ती हम एमबीबीएस डॉक्टर, मेडिकल आॅफिसर के रूप में अस्पतालों में करते हैं और 5 साल बाद प्रमोशन होता था, वह भी बाध्य था। अब उसको हमने शिथिल करके दो साल प्रावधान किया है कि अगर एमडीएमएस, मेडिकल आॅफिसर के रूप में जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे हैं, तो 2 सालों में प्रमोशन हो जाएगा, उसके बाद सीधी भर्ती विशेषज्ञों की रिक्त पदों पर बहुत से पद अभी रिक्त हैं। बड़ी संख्या में पद खाली हैं। 77 प्रतिशत पद रिक्त हैं। नियुक्तियां हो प्रमोशन का क्रम इतना धीरे होता है कि वह इस प्रमोशन में आकर उस जगह को भर नहीं पाते तो 50 प्रतिशत पद की नियुक्ति सीधी भर्ती के लिए हम लोगों ने अनुमति मांगी है और मिल भी गई है। शासन से तो 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से होगी और 50 प्रतिशत प्रमोशन से होगी। संविदा वाले बीच में आते हैं और रेगुलर भी नहीं है, जो रेगुलर है वह कहते हैं कि हमने इम्तिहान वगैरह दिया है, इनको तो आपने सीधे ही ले लिया तो हमारे ऊपर कैसे बैठेंगे संविदा वाले कहते हैं कि हमने काम किया है, जब आपके पास कोई नहीं था। बड़ी असमंजस की स्थिति रहती है, सरल नहीं है, जैसा शिक्षक हैं, शिक्षक में वैसी बात नहीं रहती, वह तो संविदा में है तो उसको रेगुलर कर देना चिकित्सकों में क्योंकि प्रमोशन का मामला है और टीचर्स में भी आता है कि संविदा में आपने कर दिया तो प्रमोशन होना है। जिसकी वजह से नाखुशी व्यक्त करते हैं। ऐसी व्यवहारिक स्थितियां इस तरह के फैसलों पर बनी रहती है।
प्रश्न- राजनांदगांव का सुंदरा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल विवादों के घेरे में ही रहा, उस पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई, उसकी भी शिकायत पेंडिंग है?
टी एस- आप शिकायत अभी भिजवा दीजिए जॉच करवा देगें।
प्रश्न- रोगियों के लिए जीवन रक्षक दवा थंबोलिटिक की कमी है। आखिर क्या कारण है की दवाइयां सुचारू रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही है?*
टीएस - प्रबंधन करना और आवश्कता अनुसार उस दवा की खरीदी करके दवाइयों का प्रबंधन करना हमारी महत्ती जिम्मेदारी हैद्य खरीदी की जो व्यवस्था है सीजीएमसी के माध्यम से या अगर सीजीएमसी के पास नहीं है, तो चाहे तो मेडिकल कॉलेज हो या जिला अस्पताल हो उनको अनुमति दी हुई है। खरीदी के लिए जब भी उनको दवाइयां चाहिए या नहीं मिल पा रही है या स्टॉक में नहीं है, सीजीएमसी के पास तो खरीदी करने की अनुमति दी हुईं है, जब तक सीजीएमसी के पास उपलब्ध ना हो तो कोई बात नहीं है। कभी-कभी बाधा के रूप मे यह बात आती है कि दवाई बाजार में नहीं मिल रही है। रेमडिसिवर इत्यादि को हमने देखा अब इतना ज्यादा हो गया कि उसका उपयोग नहीं उस समय मारामारी हो रही थी कि हर आदमी को चाहिए, उस बात के आधार पर हमने बहुत खरीदी कर ली तो यह दोनों स्थितियां बन जाती है। कभी-कभी दवाइयों की कमी होती है, दवाई उपलब्ध ही नहीं है। यह जो ब्लैक फंगस की स्थिति आई थी, उसकी भी दवाई सीमित मात्रा में थी और देश में ही उपलब्ध नहीं थी, जैसे वैक्सीनेशन अभी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है तो जो चीज उपलब्ध ही नहीं उसके लिए प्रबंधन केंद्र सरकार से बात करती है। उपलब्धता के लिए राज्य सरकार फैक्ट्री लगा नहीं सकती, जो फैक्ट्रियां लगी हुई है उससे आपको प्रोडक्शन बढ़ाना है, तो वह केंद्र सरकार के माध्यम से फिक्स रहता फैक्ट्रियों से उनका लिंक रहता है, हमको इसकी कमी हो रही है तो उपलब्ध कराओ। ज्यादा प्रोडक्शन करो अन्य किसी कारण से दवाइयां मिल नहीं रही हो तो ये प्रबंधन की कमी नहीं है। जानकारी मिलेगी तो अवश्य उस कमी को दूर करेगें।
प्रश्न- अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु क्या प्रयास किए जा रहे हैं?*
टीएस - कानून देश का बना हुआ है, नियम राज्य के नहीं बने अभी पहल करके जितने प्रभावित नागरिक हैं, उन लोगों के प्रतिनिधियों से हम लोगों ने बैठक की है जो बातें आई है उनको लिपिबद्ध करके और अन्य विभागों को भेजकर उनकी राय लेकर उनकी सहमति लेनी होगी अगर आप किसी गांव को कहते हैं कि ग्रामसभा का अधिकार है भूमि किस प्रयोजन के लिए उपयोग में लाना तो मान लीजिए कि बांध बनाने के लिए लाना है, जमीन डुबान में आ रही है, तो ग्राम सभा की सहमति का प्रावधान होगा तो भी नियम नहीं बने तो लागू नहीं हो रहे अब सिंचाई विभाग से भी पूछना पड़ेगा कि यह पेसा कानून में अधिकार देना चाह रहे तो आपका मत क्या है। आपको माइनिंग के लिए जमीन देनी है आप कहेंगे कि हम ग्राम सभा को देना चाहते हैं, मेरी व्यक्तिगत इच्छा है कि यह अधिकार ग्राम सभा के पास होना चाहिए तो वह बात आती है कि माइनिंग डिपार्टमेंट कंसल्ट करके उनको लगेगा हमारा काम बाधित हो रहा है और हम माइन नहीं दे रहे हैं तो राज्य को आमदनी नहीं मिलेगी तो एक तरफ माइंन देना और एक तरफ वहां के नागरिक का अधिकार कि यहां पर आप खनन का काम करोगे तो हमारी सहमति है कि नहीं बिना हमारी सहमति के बाधाएं इसीलिए आती है आसान नहीं है यह बहुत बुनियादी बातें है, जिसमें प्रबंधक के टकराव की स्थिति अंतर विभागों के टकराव की स्थिति बनती है द्य मेरा व्यक्तिगत मत है कि अधिक से अधिक व्यावहारिक अधिकार हो जो ग्राम सभाओं को मिलने चाहिए।
प्रश्न- पंचायती राज अधिनियम में ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी के लिए क्या विशेष कदम उठाए जा रहे हैं?
टीएस- पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी एक तिहाई की उपस्थिति का है। कम से कम एक तिहाई ग्राम सभा की उपस्थिति में महिलाओं की उपस्थिति होनी चाहिए, जो जायज ग्रामसभा है या कहे पचास परसेंट जो आप सभा कर रहे हैं, पेसा कानून के अंतर्गत सबके विचार में है कि कोरम कितने का होना चाहिए। सचिवालय होना चाहिए कि नहीं ग्राम सभा में और सचिवालय का सचिव कौन होना चाहिए, कोष होना चाहिए कि नहीं ग्राम सभा का अलग से फंड होना चाहिए कि नहीं पंचायत है, तो ग्राम सभा का उत्तरदायित्व तो होना चाहिए, जो भी काम करें उसकी रिपोर्ट पूरी ग्रामसभा में देगा ग्राम सभा जो कहेंगे वो ग्राम पंचायत करेगी बहुत सारी चीजें हैं, जो इस दायरे में है वह सरपंच कहेंगे कि हमको ग्राम सभा के नीचे कर दिया पर ग्रामसभा मतलब ग्रामसभा उसमें कई चीजें रहती है।

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