नई शिक्षा नीति में हिंदी बनी सिरमौर,35000 छात्रों ने कराया पंजीयन
भोपाल
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मुख्य विषय के रूप में हिंदी भाषा को चुनने का मौका मिला तो प्रदेश के छात्रों ने इसे सिरमौर बना दिया। स्नातक प्रथम वर्ष के मुख्य विषय के रूप में हिंदी को 35 हजार विद्यार्थियों ने लिया है। इसके बाद इतिहास को 26 हजार, राजनीति शास्त्र को 19 हजार विद्यार्थियों ने मुख्य विषय के रूप में लिया है। वहीं, अंग्रेजी विषय को सिर्फ चार हजार विद्यार्थियों ने लिया है। जानकारों का कहना है कि एमपी पीएससी की मुख्य परीक्षा में हिंदी के दो प्रश्न पत्र अनिवार्य होते हैं। इस कारण भी विद्यार्थियों का रुझान बढ़ा है।
इस साल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूजी के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को एक मुख्य, एक गौण, एक वैकल्पिक, एक व्यावसायिक विषय अनिवार्य किया गया है। साथ ही एक प्रोजेक्ट आधारित या अप्रेंटिस को भी शामिल करना है। इस साल अंग्रेजी विषय को सिर्फ चार हजार विद्यार्थियों ने मुख्य विषय के रूप में पसंद किया है। वहीं विज्ञान संकाय में बॉटनी में 30 हजार, गणित में 14 हजार, रसायन शास्त्र को 10 हजार ने मुख्य विषय के तौर पर लिया है। विज्ञान संकाय में भौतिकी को सबसे कम 1600 विद्यार्थी ने चुना है। बता दें कि प्रदेश के निजी व सरकारी कालेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) में प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
मुख्य विषय में ही करना होगा पीजी
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले विद्यार्थी यूजी के किसी भी महत्वपूर्ण तीन विषयों में से किसी एक में पीजी कर सकते थे, लेकिन अब यूजी में जो मुख्य विषय लेंगे, उसी में पीजी करेंगे। इस कारण भी विद्यार्थियों के बीच हिंदी पसंदीदा विषय बनी है।
मुख्य विषय के रूप में विद्यार्थियों ने चुना
कला संकाय
हिंदी -35808
इतिहास-26039
राजनीति शास्त्र-19339
भूगोल - 11561
समाजशास्त्र -5778
अंग्रेजी - 4062
विज्ञान संकाय
वनस्पति शास्त्र-30329
गणित- 14151
रसायन शास्त्र -10434

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