Saturday, October 24th, 2026

मिट्टी आधारित मूर्ति निर्माण का महत्व एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल

मिट्टी हमारे परिवेश का हिस्सा है और मिट्टी का कल्पनाशील उपयोग ही संस्कृति की शुरुआत है। ये विचार भारत भवन, भोपाल के वरिष्ठ कलाकर्मी देवीलाल पाटीदार ने मंगलवार को विज्ञान भवन में ‘मिट्टी आधारित मूर्ति निर्माण का महत्व एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण’  विषय पर हुई जागरुकता कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये।

पाटीदार ने कहा कि माटी तकनीक में काम करने का विज्ञान पीछे छूट गया है। पारंपरिक कारीगर अपना प्रॉडक्षन बदल नहीं पाये हैं। लेकिन अच्छे वैज्ञानिकों और कारीगरों की मदद से इसमें परिवर्तन किया जा सकता है। एक-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के तहत किया गया था।

महानिदेशक डॉ.अनिल कोठारी ने कहा कि मिट्टी मनुष्य को अपनी जमीन से जोड़ती है। मिट्टी से बनी चीजों को अपनाकर पारिस्थिति तंत्र को बहाल किया जा सकता है।  मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाने पर केंद्रित यह कार्यशाला  विज्ञान और अध्यात्म दोनों स्तरों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक तस्नीम हबीब वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र के प्रभारी समीर कुमरे ने भी उदबोधन दिया। वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र के प्रमुख हरि नटराजन ने जागरूकता कार्यक्रम के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि गणेशजी की इको फ्रेंडली मूर्ति के सृजन को बढ़ावा देकर पर्यावरण को बचाया जा सकता है।

कार्यशाला में माटी कला विशेषज्ञ भारद्वाज ने प्रतिभागियों को मिट्टी से ग्रीन गणेशजी बनाने का प्रशिक्षण देने के साथ ही वैज्ञानिक जानकारियों से परिचित कराया।

 

#मिट्टी आधारित मूर्ति

Source : Agency

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