समझौता शुल्क की आड़ में बढ़ने लगा शहर में अवैध निर्माण
भोपाल
नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखामें शहर की कॉलोनियों में बिना अनुमति के बने भवन और अनुमति से अधिक निर्माण समझौता शुल्क की आड़ में अब बढ़ने लगे हैं। नियमानुसार अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आने पर उनकी जांच निगम को करवानी चाहिए लेकिन अधिकारियों और आर्किटेक्चरों के तालमेल से अब समझौता शुल्क के जरिए मामले को दबाया जा रहा है। अवैध निर्माण में उन आर्किटेक्चरों का भी बड़ा हाथ है। जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया था। कायदे से तो निगम को इन के खिलाफ कार्यवाही करनी थी। निगम ने औपचारिकता निभाने के लिए कुछ आर्किटेक्चरों के कोड बंद भी किये थे लेकिन उन पर न तो जुर्माना लगाया और न ही उनका रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया।
अवैध संपत्ति स्वामियों को निर्माण वैध कराने के लिए समझौता शुल्क (प्रशमन शुल्क) जमा करना होगा। यदि निर्माण बिना अनुमति है तो निर्माण मंजूरी शुल्क का पांच गुना राशि अदा करना होगी और मंजूरी से ज्यादा निर्माण किया है तो मंजूरी शुल्क के साथ समझौता शुल्क भी देना होगा। यह शुल्क शहर के अंदर तय जमीन के कलेक्टर गाइड लाइन के रेट से 30 प्रतिशत तक होगा। व्यावसायिक भवनों के लिए यह राशि जगह के हिसाब से निर्धारित की जाएगी।
इस समय सीएम हेल्पलाइन निगम के अफसरों के लिए फजीहत का सबब बन रही है। हर मंगलवार को होने वाली टीएल की बैठक में इनके निराकरण का जवाब देना होता है इसलिये निगम के कई अफसर कर्मचारियों की मदद से शिकायतों को जबरिया बंद करवाने में लगे हैं तो कई समस्या का निराकरण किए बिना ही जवाब दे देते हैं।
शकीला बानो बिल्डिंग के पास मकान नंबर 26 में बिना निगम की अनुमति दो मंजिला भवन निर्माण कर लिया गया। इसकी शिकायत निगमायुक्त को अप्रैल 2017 में पहुंची थी। स्थिति ये है कि यहां दुकानें बनाकर बेच दी गई और किराए की वसूली भी हो रही है। ऐसे कई मामले शहर भर में सामने आ रहे हैं।
गांधीनगर में एसबीआई पुलिस थाने के पास सरकारी जमीन पर पक्की दुकानें बेचने की शिकायत बीते करीब तीन माह से निगम में हो रही है। इसकी शिकायतें लगातार तीन बार निगम के पास पहुंची, जांच के आदेश दिए, लेकिन अफसरों ने लीपापोती कर दी। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ऐसी शिकायतें पेंडिंग हैं।
न्यूलांबाखेड़ा में सरकारी जमीन पर कब्जा कर भवन निर्माण करने की शिकायत निगम कार्यालय पहुंची थी। मकान नंबर 183 के सामने की यह स्थिति है। सड़क पर भवन बनने से इसके सामने रहने वाले का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

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