मुझे कांग्रेस और बीजेपी दोनों का अनुभव है: रामदास आठवले
नई दिल्ली । रामदास आठवले संसद में बोलते हैं, तो उनका अंदाज-ए-बयां जुदा होता है। राष्ट्रपति अभिभाषण के दौरान सोमवार को यह फिर दिखा। आरपीआई नेता और केंद्री मंत्री आठवले ने पीएम मोदी की तारीफ तुकबंदी वाली कविता पढ़ी, तो साथ जी कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे की तारीफ भी की। वह खडगे की तारीफ में इस कदर डूब गए कि सभापति को उन्हें याद दिलाना पड़ा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोल रहे हैं।
आठवले ने अपने ही अंदाज में भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा, 'यह अभिभाषण देश के विकास के लिए है। समाज को जोड़ने के लिए भाषण है। सभी पार्टियों को साथ लेकर देश के विकास के लिए भाषण है। लोकतंत्र में अलग अलग पार्टियां होती हैं, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप होते हैं, लेकिन उसके बावजूद हम सभी एक हैं।' इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का जिक्र किया। उन्होने कहा, 'आनंद शर्मा कांग्रेस के नेता हैं। मैं भी कांग्रेस के साथ कई सालों से रहा हूं। और कांग्रेस पार्टी का भी मुझे अनुभव है। और बीजेपी का भी मुझे काफी अनुभव है। तो सभी पार्टी के साथ मेरे संबंध अच्छे हैं। तो लोकतंत्र में सभी संबंध अच्छे रखने हैं।'
इसके बाद आठवले प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़के की ओर मुखातिब हो गए। उन्होंने खड़गे की तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए, लेकिन साथ ही कटाक्ष भी करते रहे। आठवले ने कहा, ' कांग्रेस ने खडगे को विपक्ष का नेता बनाया। मैं बधाई देता हूं। लेकिन जब कर्नाटक में मौका आया था मुख्यमंत्री बनाने का, लेकिन तब बनाया नहीं गया। उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की आवश्यकता थी।' इस पर सभापति हरिवंश ने मुस्कुराते हुए उन्हें टोका। उन्होंने आठवले को याद दिलाया कि वह अभिभाषण पर बोल रहे हैं।
लेकिन आठवले ने खड़के की तारीफ के कसीदे जारी रखे। आठवले ने कहा, 'खडगे हमारे दलित समाज के ऐक्टिव नेता हैं। वह आरपीआई में हों या फिर कांग्रेस में रहें। हमारी मित्रता है। उनके बारे में हमको आदर है। इसीलिए उनको जब मौका मिला था, तो उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया। लेकिन मुझे मंत्री नहीं बनाया तो मैंने कांग्रेस को छोड़ दिया।' इस पर ठहाके गूंज उठे। आठवले ने खडगे से कहा कि आपको भी छोड़ना चाहिए था, लेकिन आपने नहीं छोड़ा।

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