Saturday, August 8th, 2026

13 साल बाद झीरम घाटी कांड में इंसाफ की उम्मीद, 10 अगस्त को होगी आखिरी बहस

जगदलपुर.

13 साल… एक ऐसा इंतजार, जिसमें बस्तर ने अपने नेताओं, जवानों और आम नागरिकों को खोने का दर्द झेला। अब इसी इंतजार का मामला न्याय की दहलीज पर पहुंच चुका है। 25 मई 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले की सुनवाई अब अंतिम दौर में है।

10 अगस्त को अदालत में मामले की अंतिम बहस होगी। इसके बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय की तारीख तय कर सकती है। बता दें कि इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला है, जिनमें एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं। गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों के बाद अब दोनों पक्ष अपने अंतिम तर्क रखेंगे।

दरअसल, झीरम हमले में कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई थी। महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार समेत कई लोगों और पुलिस जवानों की जान गई थी। अब 13 साल बाद सवाल सिर्फ उस हमले की याद का नहीं, बल्कि उसके गुनहगारों तक कानून पहुंचने का है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश महासचिव और अधिवक्ता अवधेश कुमार झा का कहना है कि कांग्रेस लगातार झीरम मामले में न्याय की मांग करती रही है। उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा गवाहों की गवाही और परीक्षण-प्रतिपरीक्षण पूरा हो चुका है और मामला अब फैसले के स्तर पर पहुंच गया है। अब 10 अगस्त की अंतिम बहस के बाद देश की नजर अदालत के अगले कदम पर होगी।

 

#Jhiram Valley case

Source : Agency

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