उच्च शिक्षा विभाग: मालामाल होने प्रोफेसर ले रहे वीआरएस
भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग के सवा सौ प्रोफेसरों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किए हैं। आधा दर्जन छोड़ सभी प्रोफेसरों को वीआरएस देकर रवाना कर दिया गया है। शेष प्रोफेसरों पर विभाग विचार कर रहा है। वीआरएस लेना प्रोफेसरों के लिए फायदा का सौदा है। क्योंकि शासन ने उनकी सेवा अवधि 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष किया है। उन्हें 62 वर्ष की आयुसीमा पूरा करने में ज्यादा फायदा दिखाई दे रहा है, जिसके कारण वे रिटारयर होने के पहले ही वीआरएस ले रहे हैं।
शासन ने तदर से नियमित हुए प्रोफेसरों की तदर अवधि को सर्विस में जोड़ दिया है। शत प्रतिशत पेंशन लेने के लिए उनकी 33 साल की सर्विस पूरी हो गई है। तदर अवधि को सर्विस में नहीं जोड़ा जाता तो प्रोफेसर 65 वर्ष की आयुसीमा होने का इंतजार करते।
33 साल की सर्विस देने के बाद वीआरएस लेने पर उन्हें वेतन का 50 फीसदी हिस्सा अब पेंशन के तौर पर मिलेगा। इसके साथ उन्हें बीस लाख ग्रेज्युटी, 20 लाख रुपए छुट्टियों का नकदीकरण, फैमिली वैनिफिट फंड, ग्रुप इंश्योरेंस के 5 लाख रुपए मिलाने पर प्रोफेसर को करीब 45 लाख रुपए मिलेंगे। इसका ब्याज ही दो माह के वेतन के बराबर होगा। जबकि वर्तमान में इनकम टैक्स तीन माह का वेतन ले जाता है।
बीआरएस लेने पर सिर्फ एक माह की पेंशन ही आईटी को जाएगी। विभाग को सेवाएं देने पर प्रोफेसर को नौ माह का वेतन मिलेगा। ऐसी स्थिति में प्रोफेसर बढ़ती उम्र में घर बैठा रहना चाहते हैं। वे थोड़े से फायदे के लिए कोरोना संक्रमण में घर दूर रहकर कॉलेजों में पढाना नहीं चाहते हैं।

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