हाईकोर्ट ने सालभर में हुई हड़तालों की जानकारी मांगी, याचिका हड़ताल असंवैधानिक
जबलपुर
हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के तहत हड़ताल अवैध है, तो सिर्फ केंट जबलपुर ही क्यों, प्रदेश में हुई सभी हड़तालों को असंवैधानिक घोषित करना होगा। ऐसा किए जाने पर ही जनहित की मंशा पूरी होगी। कोर्ट ने प्रदेश में पिछले एक साल में हुई हड़तालों का ब्योरा मांगा। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की डिवीजन बेंच ने अधिवक्ता यश सोनी को यह जिम्मेदारी सौंपी। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
जबलपुर केंट निवासी उमेश पासी व सुरेंद्र यादव के अधिवक्ता यश सोनी ने कोर्ट को बताया कि जनहित याचिका 2020 में दायर की गई थी। इसके जरिये नौ नवंबर, 2020 को केंट बोर्ड में शासकीय कर्मचारियों के धरना, प्रदर्शन और हड़ताल को चुनौती दी गई थी। तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के टीके रंगराजन विरुद्ध तमिलनाडु राज्य मामले में दिए फैसले के तहत उक्त हड़ताल को असंवैधानिक घोषित किया जाए। उक्त फैसले में व्यवस्था दी गई है कि शासकीय कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को कहा कि वे मध्य प्रदेश में विगत एक वर्ष में हुई सभी हड़तालों की जानकारी प्रस्तुत करें। इस अवधि में किन-किन लोगों, संस्थाओं व एजेंसियों ने हड़ताल की है, इस सिलसिले में तथ्यात्मक ब्योरा एकत्र कर पटल पर रखा जाए। ताकि, वे सभी नाम उजागर हों, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए अवैधानिक रूप से हड़ताल की है।

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