Sunday, October 25th, 2026

पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई, दो विभागों ने कोर्ट में चुनाव समय आगे बढ़ाने दी अर्जी

भोपाल
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराने को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर होने वाली सुनवाई के बाद यहां होने वाले चुनावों का भविष्य तय होगा। सरकार यह मानकर चल रही है कि चुनाव तो होंगे लेकिन उसमें आरक्षण मिलता है या नहीं, यह कोर्ट तय करेगा। दूसरी शासन के दो विभागों ने भी अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर नगरीय निकायों के परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया के आधार पर चुनाव का समय आगे बढ़ाने को कहा है। अब इन दोनों ही विभागों के अधिकारियों को कोर्ट के निर्णय का इंतजार है।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से ओबीसी को आरक्षण देने के लिए पुनर्विचार याचिका लगाने के तथ्यों के साथ नगरीय विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास और राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपने तथ्य और तर्क पेश किए हैं। इसमें जो महत्वपूर्ण बात सामने आई है वह आरक्षण को लेकर है। बताया गया कि कमलनाथ सरकार ने जिन नगरीय निकायों को ग्राम पंचायत की स्थिति में ला दिया था उन 28 निकायों को शिवराज सरकार ने फिर नगरीय निकाय का दर्जा दिया है।

...बाद में बदल गई स्थितियां
 इन निकायों का आरक्षण और परिसीमन 2019 के आधार पर है जबकि उसके बाद स्थिति बदल गई है। वोटर लिस्ट नए सिरे से पंचायत स्तर के बजाय नगरीय क्षेत्र के हिसाब से बन गई है। इसके अलावा परिसीमन का काम भी प्रभावित हुआ है। सरकार ने सात नगरीय निकायों का दायरा बढ़ाने का काम भी 2019 के बाद किया है। इसके बाद इन निकायों में जो पंचायत शामिल हुई हैं। वे पंचायत में रहेंगी या नगरीय क्षेत्र में आएंगी, यह साफ नहीं है क्योंकि अभी आरक्षण नहीं हुआ है। पंचायतों का आरक्षण 2022 की स्थिति में होना भी अभी बाकी है। नगरीय विकास और पंचायत व ग्रामीण विकास ने इन तर्को के साथ समय सीमा में वृद्धि की मांग की है।

 

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Source : Agency

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