रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच, समुदाय ने फेसबुक पर दर्ज किया मुकदमा; 150 अरब डॉलर हर्जाने की मांग
नई दिल्ली
रोहिंग्या शरणार्थियों ने अपने समुदाय के खिलाफ नफरत वाली सामग्री को फैलाने में बढ़ावा देने का आरोप लगाकर फेसबुक (नया नाम मेटा) से 150 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हर्जाने की मांग की है। अमेरिका और ब्रिटेन में रह रहे रोहिंग्या समुदाय की ओर से सान फ्रांसिस्को की कोर्ट में मामला दर्ज कराया गया है। सोशल मीडिया कंपनी पर आरोप है कि इसने नफरत वाली सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जिससे म्यांमार में वर्ष 2017 के दौरान हिंसा और नरसंहार को बढ़ावा मिला। इसी तरह ब्रिटेन में रोहिंग्या शरणार्थियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक ब्रिटिश कानूनी फर्म ने फेसबुक को पत्र लिखाकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जीवन का सौदा करने का आरोप
अमेरिकी अदालत में दायर मामले में रोहिंग्या समुदाय के वकील ने आरोप लगाया कि कंपनी एक छोटे से देश के बाजार में बेहतर पहुंच के लिए रोहिंग्या लोगों के जीवन का सौदा करने के लिए तैयार है। वकील ने कई पुरानी आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट का भी हवाला दिया है। गौरतलब है कि म्यांमार में फेसबुक के दो करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। कई लोगों के लिए फेसबुक समाचार प्राप्त करने और साझा करने का मुख्य या एकमात्र माध्यम है।
चार प्रमुख आरोप
1 फेसबुक के एलॉगरिदम ने रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत वाले भाषणों के प्रसार को बढ़ावा दिया
2 कंपनी ने म्यांमार की राजनीतिक स्थिति से अवगत तटस्थ लोगों और तथ्य की जांच करने पर निवेश नहीं किया
3 रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली पोस्ट और अकाउंट को हटाने में कंपनी नाकाम रही
4 मीडिया और कल्याणकारी संगठनों की ओर से मिली चेतावनी के बावजूद कंपनी ने समय पर उचित कार्रवाई नहीं की
फेसबुक के खिलाफ नफरत वाले भाषण फैलाने का यह कोई पहला आरोप नहीं है। वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने फेसबुक पर आरोप लगाया कि उसका रवैया ऑनलाइन नफरत फैलाने पर अंकुश लगाने में धीमा और अप्रभावी रहा।
फेसबुक का पक्ष
ताजा आरोपों को लेकर मुकदमा दर्ज कराने पर कंपनी की अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। लेकिन वर्ष 2018 में खुद फेसबुक ने माना था कि रोहिंग्या के खिलाफ नफरत फैलाने वाली सामग्री पर रोक लगाने के लिए उसने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
नए मुकदमे से क्या फर्क पड़ेगा
अमेरिकी कानून के तहत उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री को लेकर फेसबुक को जवाबदेही से छूट मिली हुई है। लेकिन नये मुकदमे में म्यांमार के कानून को आधार बनाया गया है, जिसके तहत फेसबुक को ऐसी कोई सुरक्षा नहीं मिलती। वकीलों के मुताबिक इस मामले में कानून फेसबुक के खिलाफ प्रबल साबित हो सकता है। अमेरिकी कोर्ट विदेशी कानून के आधार पर सुनवाई कर सकती है।
रोहिंग्या का पलायन
बौद्ध धर्म बहुल म्यांमार में लोग रोहिंग्या समुदाय को अवैध प्रवासी मानते हैं। वर्ष 2017 में रोहिंग्या समुदाय के कुछ लोगों द्वारा पुलिस चौकियों पर घातक हमला करने के बाद से म्यांमार की सेना ने हिंसक अभियान चलाया। एक अनुमान के अनुसार इस अभियान में करीब 10,000 रोहिंग्या समुदाय के लोग मारे गए थे। तब से लेकर अब तक लाखों रोहिंग्या म्यांमार छोड़ चुके हैं। 7,00,000 से अधिक रोहिंग्या पड़ोसी बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं।

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