Tuesday, October 20th, 2026

गु्रप ऑफ मिनिस्टर्स ने शुरू की आंकड़ों की पड़ताल, मांगा एलिजिबल कर्मचारियों का डाटा

भोपाल
प्रदेश के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके सेवाकाल में पात्रतानुसार पदोन्नति के अवसर देने के लिए गुरुवार को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्री समूह की बैठक में मंथन किया गया। बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। इस पर और आगे चर्चा करने के लिए मंगलवार चार बजे फिर बैठक करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में गृह मंत्री के अलावा सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया,  जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार,  ग्रामीण विकास विभाग, वित्त, राजस्व और विधि विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
 
सुप्रीम कोर्ट पदोन्नति में आरक्षण के लिए राज्यों को निर्णय करने के लिए कह चुका है। मध्यप्रदेश में मौजूदा व्यवस्था के अनुसार कितने लोग पदोन्नति के लिए आवश्यक पात्रता पूरी कर चुके है और उन्हें किस प्रकार से पदोन्नति दी जा सकती है इसको लेकर फार्मूला बनाने पर चर्चा की गई। सामान्य प्रशासन विभाग को सभी विभागों से यह जानकारी एकत्रित कर समिति के सामने पेश करने को कहा गया है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में लंबे समय से पदोन्नति में आरक्षण पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अब इसमें राज्यों को ही रास्ता निकालना है। इसके लिए मंत्री समूह की बैठक बनाई गई है। लेकिन मंत्री अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था... यह राज्यों की ड्यूटी
सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी के प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए कोई मानदंड तय करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी नौकरी में एससी एसटी के प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए राज्य की ड्यूटी है कि वह एससी एसटी के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का डाटा एकत्र करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि परिमाणात्मक यानी मात्रात्मक आंकड़े एकत्र करने के लिए राज्य बाध्य हैं। एससी और एसटी के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के संबंध में मात्रात्मक डाटा पूरी सर्विस या ग्रुप से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है बल्कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व उन पदों के कैडर या ग्रेड के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिन पदों के लिए प्रमोशन मांगा गया है। ऐसे में मात्रात्मक डाटा कैडर के मद्देनजर एकत्र किया जाएगा जिनमें प्रमोशन की दरकार है।  सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 24 फरवरी को फिर सुनवाई करेगा।

 चार लाख कर्मचारी कर रहे इंतजार
 प्रदेश के चार लाख से अधिक कर्मचारी छह साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे है। इसके लिए अब सरकार गंभीर हो चुकी है। एक साल में इसके लिए दो समितियां बन चुकी है। समिति की अनुशंसा का लाभ पुलिस और जेल विभाग के कर्मचारियो को मिल चुका है।  प्रदेश में वर्ष 2016 से अब तक साठ हजार से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके है और उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिला है।

 

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Source : Agency

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