मित्रता का रिश्ता सबसे बड़ा
भोपाल । ( अपनी खबर)
यह सच है कि रिश्ता जन्म से मिलता है, और दोस्ती किस्मत से मिलती है।
मित्रता एक कच्चे धागे की तरह होती है पर सच यह भी है कि इस धागे से मजबूत कोई जंजीर नहीं होती है।
समाजसेवी लक्ष्मीनारायण त्रिकार कहते हैं कि दोस्ती से बढ़कर कुछ भी नहीं है ।
सच्चा मित्र वही होता है जो हर परिस्थिति में आपके साथ रहता है। एक सच्चा दोस्त अपने दोस्त की सफलता पर सदैव प्रसन्न रहता है।
दोस्त ऐसा बनाओ जो दिल की हर बात जान ले, हंसते हुए चेहरे के पीछे उदास चेहरा भी पहचान ले। जब भी बात आती है दोस्ती की तो कृष्ण और सुदामा की दोस्ती का प्रसंग याद आता है ।जहां एक ओर कृष्ण जैसा सम्राट द्वारिकाधीश दूसरी ओर एक निर्धन ब्राह्मण सुदामा ।
उनकी दोस्ती आज भी दुनिया के लिए आदर्श उदाहरण है।उन्होंने तो जगत को यह संदेश दिया कि दोस्त और दोस्ती कैसी हो ? उसे कैसे निभाया जाए ? सच्चा दोस्त किसी भी परिस्थिति में दोस्ती का रिश्ता नहीं तोड़ता। एक दूसरे के सुख - दुख , अनुकूल - प्रतिकूल स्थितियों में दिल से साथ देने वाले सभी दोस्तों को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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