सरकार 311 करोड़ रुपए से प्रदेश के 6 कमजोर सहकारी बैंकों को करेगी हईटेक
भोपाल
किसानों को बिना ब्याज के अल्पकालिक कृषि कर्ज, खाद, बीज वितरण, समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदी करवाने वाली जिला सहकारी बैंक ग्रामीण अंचलों में उनसे जुड़ी प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा समय पर वसूली नहीं किए जाने और कर्जमाफी की उम्मीद में समय पर किसानों द्वारा कर्ज अदा नहीं किए जाने से घाटे में चल रही है। प्रदेश की 6 कमजोर जिला सहकारी बैंकों को राज्य सरकार नाबार्ड की मदद से 311 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने की तैयारी में है।
इसके अलावा खरगौन जिला सहकारी बैंक की तर्ज पर इन बैंकों में मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी हाईटेक सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी। मध्यप्रदेश में 38 जिला सहकारी बैंकें संचालित की जा रही हंै। इनके अधीनस्थ कई बैंक शाखाएं अलग-अलग जिलों की आबादी के हिसाब से संचालित हो रही है। लेकिन अंदर की बात यह है कि किसानों को शून्य फीसदी कर्ज वितरण और उसकी वसूली में सख्ती नहीं किए जाने के निर्देश के चलते वसूली लगातार कम हो रही है। ब्याज सब्सिडी की राशि सरकार द्वारा देरी से देने के कारण भी सहकारी बैंकों की हालत खराब है। गेहूं और मोटे अनाज के उपार्जन के लिए पहले अपनी पूंजी लगाने वाली इन सहकारी बैंकों को इसकी अदायगी सरकार बाद में करती है। इस सबके चलते बैंकों की हालत खराब है।
ये हैं कमजोर बैंक
प्रदेश की रीवा, सीधी, सतना, ग्वालियर , दतिया और मुरैना छह जिला सहकारी बैंकें कमजोर बैंकों की श्रेणी में हैं। इन्हें ही 311 करोड़ की आर्थिक मदद देकर सुदृढ़ बनाया जाएगा।
खरगौन की तरह बैंकों में होगी सुविधाएं
जिला सहकारी बैंक खरगौन में आॅनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा शुरू की गई है। यह सभी सुविधाएं प्रदेश की अन्य जिला सहकारी बैंको में भी शुरू की जाएंगी। इससे सहकारी बैंको का कामकाज और व्यवसाय भी बढ़ेगा। काम ज्यादा बढ़ेगा तो उनकी आर्थिक स्थिति भी और मजबूत होगी।

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