Tuesday, October 20th, 2026

कर्नाटक में हिजाब पहनकर आने वालीं लड़कियों को कॉलेज में नहीं दी एंट्री

बेंगलुरु

कर्नाटक के कई कॉलेजों में हिजाब पहनकर आने वालीं लड़कियों को कॉलेज में एंट्री नहीं दी जा रही है। वहीं, हिजाब के जवाब में हिंदू लड़कियां केसरिया दुपट्टा पहनकर आने लगी हैं। विवाद की शुरुआत उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी, जहां जनवरी में हिजाब पर बैन लगा दिया था। इस मामले के बाद उडुपी के ही भंडारकर कॉलेज में भी ऐसा ही किया गया। अब यह बैन शिवमोगा जिले के भद्रवती कॉलेज से लेकर तमाम कॉलेज तक फैल गया है। इस मामले को लेकर रेशम फारूक नाम की एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट याचिका दायर की है। इसमें कहा गया कि हिजाब पहनने की अनुमति न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का हनन है। गुरुवार को भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी छात्राओं को कॉलेज के प्रिंसिपल ने अंदर नहीं आने दिया था। उनका तर्क था कि शासन के आदेश व कालेज के दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें कक्षाओं में यूनिफॉर्म में आना होगा। जबकि छात्राओं का तर्क था कि वे लंबे समय से हिजाब पहनकर ही कॉलेज आती रही हैं।

कर्नाटक सरकार ने दिया आदेश
मामला तूल पकड़ने के बाद कर्नाटक सरकार के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने गुरुवार को स्प्ष्ट कहा कि स्कूल-कॉलेजों में स्टूडेंट्स न हिजाब पहनकर आ सकते हैं और न ही भगवा गमछा पहनकर। उन्होंने पुलिस से इस मामले पर पैनी नजर बनाए रखने को भी कहा है। सरकार ने ऐसे धार्मिक संगठनों की निगरानी करने को कहा है, जो माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। गृहमंत्री इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां सभी धर्मों के छात्रों को साथ में बैठकर सीखना चाहिए। हम अलग नहीं हैं। हम सभी भारत माता के बच्चे हैं।

सरकार ला सकती है एक यूनिफॉर्म कोड
कर्नाटक सरकार कॉलेजों में एक यूनिफॉर्म लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों में सार्वभौमिक भावना होनी चाहिए। गणतंत्र दिवस 2022 से एक दिन पहले कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा जनेंद्र ने इस संबंध में बयान दिया था। अरागा जनेंद्र ने मीडिया से चर्चा करते हुए सवाल उठाया कि अगर छात्र धर्म की तरह व्यवहार करेंगे, तो ये अधिक महत्वपूर्ण है, कि हम किस तरह का भविष्य बना रहे हैं? 

 

Source : Agency

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