पीले दांतों से आज ही पाएं छुटकारा
अगर आपके दांत पीले हो रहे हैं और मुंह से बदबू आती है, तो संभव है ऐसा आपके दांतों पर पीली परत (Dental plaque) जमने की वजह से हो सकता है। आम भाषा में इसे पीला मैल भी कहा जाता है। आप जो भी कुछ खाते-पीते हैं उसके कण दांत-मसूड़ों पर चिपकते हैं और इन्ही से प्लेक बनता है। अगर आप दांतों की नियमित सफाई और ब्रशिंग और फ्लॉसिंग से प्लेक को नहीं हटाते हैं, तो यह कैविटीज़, मसूड़ों की बीमारी, पायरिया, मुंह से बदबू आना, दांतों का पीला होना, मसूड़ों से खून आना आदि कई ओरल प्रॉब्लम की वजह बन सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट (Ref) के अनुसार, प्लेक को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसकी सफाई नहीं करने पर यह दांतों की जड़ों में घुस जाता है और उन्हें खोखला करना शुरू कर देता है। इसकी मात्रा बढ़ने से आपको कई लक्षण महसूस हो सकते हैं जैसे- दांतों पर चिपचिपा महसूस होना, मुंह से बदबू आना, लाल, सूजे हुए मसूड़े जिनमें ब्रश करने के बाद खून आता है। दांतों में मैल तब बनता है जब आपके मुंह में बैक्टीरिया दूध, जूस, कोल्ड ड्रिंक, ब्रेड, पास्ता और फल जैसे मीठे या स्टार्च वाली चीजों के साथ मिल जाते हैं। इसकी सफाई नहीं करने से आपको कैविटी, गम डिजीज, दांतों में इन्फेक्शन और दांतों का गिरना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
रोजाना फ्लॉस करें
दांतों के बीच फंसे भोजन और प्लेक से छुटकारा पाने के लिए दिन में एक बार डेंटल फ्लॉस से फ्लॉस करें। दांतों को ब्रश करने से पहले फ्लॉसिंग करने से अधिक प्लेक निकल जाता है।
क्या हल्दी होती है पीले दांतों का कारण
दिन में दो बार ब्रश करें
मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट से अपने दांतों को दो मिनट तक ब्रश करें। दिन में कम से कम दो बार और बेहतर होगा कि प्रत्येक भोजन के बाद ब्रश करें।
शुगर फ्री गम से मिलेगा फायदा
यदि आप खाने या पीने के तुरंत बाद ब्रश नहीं कर सकते हैं, तो शुगर-फ्री गम चबाएं। इससे आपके मीठा खाने की लालसा भी कम हो सकती है और दांतों की सफाई भी हो सकती है।
हेल्दी डाइट लेना है जरूरी
शुगर और स्टार्च वाले फूड्स और ड्रिंक्स का जितना हो सके उतना कम सेवन करें या करें ही न। इसके बजाय, सादा दही, पनीर, कच्ची सब्जियां और फलों का अधिक सेवन करें।
डेंटिस्ट के पास जाएं
अधिकतर लोग कुछ बड़ी समस्या होने पर डेंटिस्ट के पास जाते हैं। दांतों की बेहतर देखभाल के लिए आपको दो या तीन महीने में एक बाद डेंटिस्ट के पास जाना चाहिए। साल में कम से कम तीन बार दांतों की जांच और सफाई कराएं। इसके अलावा रोजाना ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) या प्रिस्क्रिप्शन एंटीसेप्टिक माउथवॉश से कुल्ला करें।

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