Wednesday, October 21st, 2026

सिरमौर की पूर्व ज्वॉइंट कलेक्टर अंजलि द्विवेदी ने जुर्माने के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की याचिका

भोपाल
राज्य सूचना आयोग के सूचना आयुक्तों की कार्यप्रणाली पर जिले के प्रशासनिक अफसर ने सवाल खड़े किए हैं। रीवा जिले के सिरमौर की पूर्व संयुक्त कलेक्टर अंजलि द्विवेदी ने सूचना आयुक्त द्वारा लगाए गए जुर्माने और उनकी कार्यप्रणली को लेकर मुख्य सूचना आयुक्त को दिए गए जवाब में स्पष्ट कहा है कि सूचना आयुक्त उन्हें किसी भी तरह फंसाना चाहते हैं और दंडित करने का मन बना चुके हैं। उन्हें भय है कि सूचना आयुक्त निष्पक्ष आदेश करने की स्थिति मेें नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि कार्यवाही में जिस तरह असत्य जानकारी अंकित की जा रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कोई ठग पत्रकार छोटे कस्बे में कार्यरत सीधे अधिकारी को फेक न्यूज के माध्यम से ब्लैक मेल करने की कोशिश कर रहा है। यह पूरा मामला रीवा जिले के सिरमौर में राज्य सूचना आयोग में पहुंची एक अपील से जुड़ा हुआ है।

अपीलार्थी शिवकुमार पांडे को भू-अर्जन की कार्यवाही के दौरान तहसीलदार द्वारा कमिश्नर कार्यालय भेजी गई कोई जानकारी चाहिए थी। इस मामले में सूचना आयुक्त ने एसडीएम अंजलि द्विवेदी पर अपीलार्थी को जानकारी नहीं देने को लेकर जुर्माना लगा दिया। मामला जब मुख्य सूचना आयुक्त एके शुक्ला के पास पहुंचा तो उन्होंने इस मामले में 22 हजार 500 रुपए के जुर्माने की सजा बरकरार रखी है। हालांकि अंजलि द्विवेदी ने  राज्य सूचना आयोग के इस फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

इस पूरे मसले पर जब मुख्य सूचना आयुक्त एके शुक्ला से उनका पक्ष जानने के लिए बात की गई तो उनका कहना था कि पत्रकार उनसे किसी खबर पर इंटरव्यू नहीं कर सकते और इसका वे कोई जवाब नहीं देंगे। जहां तक फैसले का सवाल है तो इसकी फीस जमा करके इसे आयोग से प्राप्त किया जा सकता है।

संयुक्त कलेक्टर अंजलि द्विवेदी ने कहा कि यह सूचना उनके पूर्व इस पद पर पदस्थ अधिकारी को तीस दिन में देनी थी। इसके अलावा दो अन्य अधिकारी भी पदस्थ रहे लेकिन चार अधिकारियों में से केवल मुझे दोषी करार देते हुए जुर्माना लगाया गया। सूचना आयुक्त का यह व्यवहार निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता। धारा 20 और 19 में भी नोटिस मुझे दिए गए। सूचना आयुक्त एक पक्षीय कार्यवाही कर रहे हैं। मुख्य सूचना आयुक्त ने इस पर मुझसे जवाब मांगा था उसमें मैंने पूरी बाते उन्हें विस्तार से लिखित में दी हैं। आयोग के इस फैसले के खिलाफ मैंने जबलपुर हाईकोर्ट में अपील भी की है। इस पर सुनवाई अभी होना बाकी है।

संयुक्त कलेक्टर अंजलि द्विवेदी ने अपने जवाब में मुख्य सूचना आयुक्त को बताया कि सुनवाई के दौरान अपीलार्थी शिवकुमार पांडेय उनके साथ ही उपस्थित थे और उन्होंने यह स्पष्ट कहा था कि वे अंजलि द्विवेदी के समक्ष में कभी नहीं मिले, केवल कार्यालय के सहायक विकास मिश्रा से मिले थे। वह भी उनके पदभार ग्रहण करने से पहले। उनके प्रभार ग्रहण करने के बाद अपीलार्थी कभी उनके कार्यालय आए ही नहीं। सूचना आयुक्त ने अपनी टीप में असत्य जानकारी का उल्लेख किया। यह उनमें भय तथा अविश्वास पैदा करता है। इस असत्य उल्लेख से यह आभास होता है जैसे कोई ठग पत्रकार फेक न्यूज के जरिए उन्हें ब्लैक मेल करने का प्रयास कर रहा है।

 

#Anjali Dwivedi

Source : Agency

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