गर्भवती महिलाओं व कुपोषित बच्चों के इलाज हेतु अब आनलाइन आंचल की छांव में कुपोषण से मुक्ति
भोपाल
राजधानी को कुपोषण से मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल की है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों का गांव में ही स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। साथ ही निश्शुल्क दवाइयां एवं पोषण परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं गर्भ से ही बच्चों की मॉनीटरिंग शुरू कर दी जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा कुपोषित न हो।
जिला पंचायत भोपाल की मदद से इसके लिए एक ''आंचल" नाम का मोबाइल एप बनाया गया है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को टैबलेट देकर उनके क्षेत्र में आने वाली हर गर्भवती महिला का डाटा फीड किया जाएगा। इस डाटा के आधार पर कलर कोडिंग की जाएगी। डाटा फीडिंग (जन्म से 05 वर्ष के बच्चे एवं गर्भवती महिलाएं) के बाद संबंधित डॉक्टर के पास ऑनलाइन यह डाटा चला जाएगा। डॉक्टर द्वारा मरीज की गंभीरता के अनुसार कलर कोडिंग कर एप में परामर्श के लिए दर्ज किया जाएगा। इसके बाद सर्वे टीम द्वारा चिन्हांकित मरीज का परामर्श सत्र व समय ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। परामर्श सत्र व समय की जानकारी का संदेश मरीज को एसएमएस से भी प्राप्त होगा।
बता दें कि राजधानी में अब भी 2,542 कुपोषित बच्चे हैं। इसमें से 330 बच्चे तो अति गंभीर कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इस पहल के बाद बच्चों को गोद लेकर उन्हें बेहतर पोषण दिलाए जाने की भी तैयारियां की जा रही हैं।
परामर्श सत्र के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर, एएनएम उपस्थित रहकर ऑनलाइन वीडियो कॉल के माध्यम से परामर्श सत्र संचालित करेंगी। यह कॉल डॉक्टर की ओर से दिए गए टैबलेट पर रिसीव होगा। डॉक्टर द्वारा दिए गए पमरार्श का पीडीएफ फॉरमेट में प्रिसक्पिशन एप में अपलोड हो जाएगा। सहयोगी टीम द्वारा ऑफलाइन बनाए गए परामर्श सत्र पर्चे में मेडिसिन व आवश्यक सलाह मेनुअल लिखा जाएगा।
चिकित्सक द्वारा यदि कोई जांच या कोई गंभीर बीमारी चिन्हांकित की जाती है, तो ऐसी स्थिति में जेपी अस्पताल भोपाल को नोडल अस्पताल बनाया गया है, जहां पर समस्त जांचें एवं रेफर किए गए मरीज को आवश्यक दवाएं निश्शुल्क वितरित की जाएंगी। हर सप्ताह परामर्श सत्र का संचालन किया जाएगा। जिसमें पूर्व में परामर्श प्राप्त मरीजों का फॉलोअप भी लिया जाएगा।

पाठको की राय