Monday, October 26th, 2026

ऑडिट रिपोर्ट के बिना फिक्स नहीं होगी फीस , प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई

भोपाल
राज्य के सभी इंजीनियरिंग और एमबीए की आगामी तीन सत्र 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की फीस निर्धारित होना है, लेकिन कॉलेजों की आॅडिट रिपोर्ट के अभाव में कालेज प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति में प्रस्ताव नहीं दे पा रहे हैं। इसलिये फीस कमेटी ने आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई दी थी। इंजीनियरिंग और एमबीए कॉलेजों की फीस फिक्स करने में फीस कमेटी कमेटी को परेशानी आने लगी है। कार्यक्रम के तहत अभी तक उनकी फीस फिक्स होना थी, लेकिन कॉलेजों द्वारा चाटर्ड एकाउंटेंट से तैयार कराई गई आॅडिट रिपोर्ट फीस कमेटी नहीं भेजी है।

फीस कमेटी ने 25 जुलाई तक प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है। अब कमेटी उनके प्रस्ताव आने के बाद ही फीस निर्धारित करने का कार्य शुरू करेगी। वहीं दूसरी तरफ एआईसीटीई ने कॉलेजों को निरंतरता देना शुरू कर दिया है। तकनीकी शिक्षा विभाग में भी काउंसलिंग को लेकर कार्यक्रम तैयार करने में लग गया है। अगस्त में काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी होने के पहले कॉलेजों की फीस फिक्स कर दी जाएगी।

फीस कमेटी बिना बैलेंस सीट के फीस निर्धारण नहीं करेगा। इससे कॉलेजों की समस्याएं जरुर बढ़ गई हैं। फीस कमेटी को अभी प्रोफेशनल कोर्स में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर, होटल मैनेजमेंट, नर्सिंग और मेडिकल कोर्स संचालित करने वाले कॉलेजों की फीस निर्धारित करना शेष है।

कॉलेजों में शिक्षकों की पूर्ति के लिए 29 तक जमा होंगे अतिथि विद्वानों के आवेदन
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त द्वारा कॉलेजों में शिक्षकों की पूर्ति के लिए पुराने व नए अतिथि विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। विभाग द्वारा इसकी समय सारिणी जारी की गई है। इसके आधार पर जो अतिथि विद्वान लगातार सेवा देते आ रहे हैं। उनकी प्रोफाइल अपडेट करने 26 जुलाई का समय दिया गया है। इसमें अतिथि विद्वान अपनी डिग्री और अनुभव अपडेट कर सकेंगे। उन्हें 25 से 28 जुलाई तक अपना वेरिफिकेशन करवाना होगा। इसके बाद प्राचार्य रिक्त पदों की जानकारी आयुक्त कार्यालय को भेजेंगे और उन रिक्त पदों पर फिर चॉइस फिलिंग और नए आवेदन 29 जुलाई से 10 अगस्त तक होंगे। इसकी चयन सूची विभाग 20 से 25 अगस्त तक जारी करेगा।

अतिथि विद्वान 20 से 26 अगस्त तक जॉइनिंग दे सकेंगे। वहीं अतिथि विद्वानों की इस नियुक्ति का विरोध भी शुरू हो गया है। अतिथि विद्वान महासंघ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। महासंघ के मीडिया प्रभारी डॉ. आशीष पांडेय ने कहा की प्रदेश सरकार ने अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का वादा किया, लेकिन वादा पूरा करने के बजाय अतिथि विद्वानों के साथ छलावा कर ध्यान भटकाया जा रहा है।

 

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Source : Agency

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