Saturday, October 24th, 2026

एक सप्ताह के अंदर फौती नामांतरण शेष नहीं रहेंगे: एसडीएम मेहरा

छतरपुर
तहसील छतरपुर के अंतर्गत दो साल से फौती नामांतरण स्वीकृत न किये जाने पर गुरूवार को तहसील अधिवक्ता संघ ने नाराजगी जाहिर करते हुए एसडीएम यूसी मेहरा को ज्ञापन सौंपा और बताया कि दो साल से एसडीएम द्वारा फौती नामांतरण स्वीकृत नहीं किये गये। साथ ही वर्ष 2019-20 के मामलों की 150 फाइलें तहसील कार्यालय में डंप पड़ी हैं जिनमें केवल तारीखें ही बढ़ रही हैं। अधिवक्ताओं ने बताया कि नामांतरण के नाम पर बाबू और दलाल 10 से 15 हजार रुपए मांगते हैं।

ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाए कि 60-70 फाइलें ऐसी हैं जो तत्कालीन तहसीलदार संजय शर्मा के पास थीं लेकिन आज दिनांक तक इन फाइलों का कोई पता नहीं है। जिस पर एसडीएम ने कहा कि मैं इस संबंध में बाबुओं से चर्चा करता हूं और यदि यह फाइलें नहीं मिल रही हैं तो तत्कालीन तहसीलदार संजय शर्मा को पत्र लिखूंगा। एसडीएम यूसी मेहरा ने ज्ञापन लेते हुए अधिवक्ताओं से कहा कि मैं खुद आश्चर्यचकित हूं कि फौती नामांतरण क्यों नहीं किये गये हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के अंदर कोई भी फौती नामांतरण शेष नहीं रहेगा। एसडीएम ने कहा कि दलाली प्रथा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम में लापरवाही बरतने पर बैठक में एक पटवारी को निलंबित कर दिया है।

कंप्यूटर में दर्ज कराना कठिन काम
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी तरह से नामांतरण हो भी जाता है तो कंप्यूटर मंे दर्ज कराना बहुत कठिन काम है। क्योंकि कंप्यूटर शाखा के बाबू द्वारा तरह-तरह से परेशान किया जाता है। इस पर एसडीएम ने कंप्यूटर शाखा के बाबू को तलब करने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो भी नामांतरण होगा वह तत्काल कंप्यूटर में दर्ज होगा।

सीट पर नहीं मिलते अधिकारी
एसडीएम को ज्ञापन देते समय अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कोई भी अधिकारी सीट पर नहीं मिलता है जिस कारण उन्हें परेशान होना पड़ता है। चपरासी और बाबू वकालत कर रहे हैं, जिससे असली वकील बेरोजगार हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने बताया कि महेवा नायब तहसीलदार अंजू लोधी भी तहसील आती हैं तो वह एक चैंबर में बैठकर चली जाती हैं। जनता के कोई काम उनके द्वारा भी नहीं किये जाते हैं।

 

#SDM Mehra

Source : Agency

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