Saturday, October 24th, 2026

किसान परम्परागत खेती की ओर लौंटे- कश्यप

नारायणपुर
शासन की मंशानुरूप अक्षय तृतीय के अवसर पर माटी पूजन त्यौहार आज कृषि विज्ञान केन्द्र में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड अध्यक्ष एवं विधायक चंदन कश्यप उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हम सब ने अपने खेतों में अधिकाधिक रसायनिक उर्वरकों का उपयोग कर अपने भूमि का उर्वरा शक्ति का ह्रास किया, इससे निरंतर कृषि की उर्वर क्षमता में कमी आयी और विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हुए। इन सबके निदान के लिए अब आवश्यक हो गया है कि हम सब पुरानी और परम्परागत खेती की ओर लौटे, अधिक से अधिक जैविक खाद, कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करें और अपनी अपने वाली भावी पीढ़ी को अच्छी भूमि और शुद्ध वातावरण प्रदान करें। साथ ही पशुधन को भी बढ़ावा दें। कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्यामबती नेताम और उपाध्यक्ष देवनाथ उसेण्डी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्यामबती नेताम, उपाध्यक्ष देवनाथ उसेण्डी, कलेक्टर ऋतुराज रघुवंशी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवेश कुमार ध्रुव, वनमंडलाधिकारी थेजश शेखर मुख्य रूप से उपस्थित थे।

माटी पूजन कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक चंदन कश्यप ने माटीपूजन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संदेश का वाचन भी किया। संदेश में कहा गया कि आज अक्षय तृतीया है, जिसे हम लोग अक्ती तिहार के रूप में मनाते हैं। अक्षय का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षरण न हो। जिस भी काम आज शुरूआत होती है, उसकी पूर्णता निश्चित मानी जाती है। अक्ती का यह दिन हमारी संस्कृति के साथ-साथ हमारी कृषि परंपरा में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के दिन से ही नयी फसल के लिए तैयारी शुरू हो जाती है। मिट्टी के गुड्डे-गुडि?ों की शादी की परंपरा के माध्यम से हमारे पुरखों ने इस त्यौहार को हमारी धरती से भी जोड़ा है। उनका संदेश यही था कि हमारे जीवन का मूल यही माटी है। इसे हमेशा जीवत मानते हुए उसका आदर-सम्मान करना चाहिए।

संदेश में आगे कहा गया कि पिछले कुछ दशकों में हमने अपने खेतों में रासायनिक खादों और कीटनाशको का बहुत ज्यादा उपयोग किया है। इससे हमारी धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। हमारे अनाज विषैले होते जा रहे हैं। हमारे स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है। हमारे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर हो रहा है। हम इस समय जिन तौर-तरीको से खेती कर रहे हैं. वह   प्रकृति की पूजा और सेवा की हमारी परंपरा के अनुरूप नहीं है।

 

#Kashyap

Source : Agency

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