NHAI की गुण्डागर्दी से परेशान किसान परिवार ने कहा करेंगे आत्मदाह, PL चौधरी होंगे जिम्मेदार
छतरपुर
झांसी-खजुराहो फोरलेन के निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक पीएल चौधरी द्वारा एक किसान परिवार को प्रताडि़त करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उक्त मामला बमीठा थाना क्षेत्र के ग्राम बसारी से जुड़ा है। यहां के दो यादव परिवार इस फोरलेन निर्माण में अपनी जमीन खो चुके हैं। राजस्व विभाग के द्वारा की गई नापतौल में इनकी 77 आरे जमीन को एनएचएआई के द्वारा अधिग्रहीत कर निर्माण किया जा रहा है जबकि इस परिवार को मुआवजा नहीं मिला है। अब परिवार ने कलेक्टर और राजनगर एसडीएम को पत्र लिखकर मुआवजे दिए जाने की मांग करते हुए आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।
ग्राम बसारी निवासी रामरतन यादव पिता जनकू यादव ने बताया कि बसारी स्थित खसरा नंबर 2818/1 का 0.030 हेक्टेयर रकवा एनएचएआई के द्वारा फोरलेन निर्माण हेतु अधिग्रहीत किया गया था। इसी खसरा नंबर का बटांक 2818/2 का अधिग्रहीत रकवा 0.077 हेक्टेयर भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण से प्रभावित है जिसमें से रकवा 0.030 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा बनाया जा चुका है तथा शेष रकवा 0.047 हेक्टेयर का अधिग्रहण किया गया है जबकि उसकी मुआवजा राशि नहीं बनाई गई है। एसडीएम कार्यालय के द्वारा 25 सितम्बर 2021 को एनएचएआई के परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर साफ-साफ कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण से प्रभावित ग्राम बसारी की भूमि खसरा नंबर 2818/2 अधिग्रहीत रकवा 0.077 हेक्टेयर में से शेष रकवा 0.047 हेक्टेयर की भूमि अवार्ड प्रस्ताव भेजा जाए ताकि प्रभावित व्यक्ति को भूमि के शेष रकवा का अवार्ड अथवा मुआवजा दिया जा सके। इस पत्र के बावजूद एनएचएआई अब मुआवजा देने में आनाकानी कर रहा है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीएल चौधरी के द्वारा इस मामले में आवेदकों से कहा जा रहा है कि 2818/2 का अधिग्रहण ही नहीं किया गया है इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ राजस्व और एनएचएआई के अधिकारी जमीन की नापतौल कर उक्त खसरा नंबर के अधिग्रहण किए जाने संबंधी सरकारी पत्र जारी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ मुआवजा नहीं देने के लिए बहानेबाजी कर रहे हैं। पीडि़त परिवार की जमीन भी एनएचएआई के द्वारा ले ली गई है जबकि मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। अब पीडि़त परिवार आत्मदाह की चेतावनी दे रहा है।
इनका कहना
इस संबंध में दोबारा नापतौल के लिए एनएचएआई और राजस्व विभाग की पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है जो इस मामले का निराकरण करेगी। हमें जितनी जमीन पहले गजट में लेनी थी उतनी भी नहीं मिली है। 2818/2 का तो अधिग्रहण ही नहीं किया गया।
पीएल चौधरी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

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