डिलिमिटेशन बिल पर बदले डीएमके के सुर, कांग्रेस को लगा झटका
नई दिल्ली
गठबंधन टूटते ही एमके स्टालिन की डीमएके ने कांग्रेस के साथ खेल कर दिया है। दरअसल, अटकलें हैं कि संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर से डिलिमिटेशन बिल ला सकती है। हालांकि, अभी तक ऑफिशियली लिस्ट नहीं किया गया है। बिल पास करवाने के लिए जरूरी दो-तिहाई की संख्या जुटाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पिछली बार विरोध में रहने वाली डीएमके इस बार इसका समर्थन कर सकती है। इनसाइड स्टोरी के अनुसार, रविवार को हुई ऑल पार्टी मीटिंग पर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद प्रेमचंद्रन का कहना है कि डीएमके इस बिल के सपोर्ट के लिए राजी हो गई है, लेकिन दूसरी ओर डीएमके सांसद तिरुचि शिवा का कहना है कि सरकार ने अभी तक कोई साफ प्रस्ताव नहीं दिया है।
सरकार ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में डिलिमिटेशन बिल पेश किया था, लेकिन जब वह पास नहीं हो सका था। अब टीएमसी और शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट होने के बाद संख्या दो तिहाई के करीब पहुंचने लगी है। माना जा रहा है कि डीएमके भी इसका सपोर्ट कर सकती है। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने 'CNN-न्यूज 18' से बताया, ''सरकार डिलिमिटेशन के लिए कोई साफ प्रस्ताव नहीं लाई है। दक्षिण राज्यों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। महिला आरक्षण बिल को मौजूदा संख्या के साथ तुरंत लागू करना चाहिए। डिलिमिटेशन पर हम सरकार से ज्यादा स्पष्टता चाहते हैं।''
सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि बिल में हर राज्य में 50 फीसदी सीटों की बढ़ोतरी वाला प्रावधान को जोड़ा जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह बात पिछली बार जब बिल पेश हुआ था, तब कह भी चुके हैं। सूत्रों ने कहा, ''अगर बिल में यह मेंशन होता है तो वे (डीएमके) पॉजिटिव तरीके से विचार करने के लिए तैयार हैं।''
हालांकि, सरकार ने मॉनसून सत्र में इसे दोबारा पेश करने के लिए लिस्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार जरूरी संख्या जुटा लेगी। डीएमके के तेवर में बदलाव तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से आया है। दरअसल, कई दशकों पुराना कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन विजय की पार्टी टीवीके के सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद टूट गया। कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया, जिसके बाद टीवीके सरकार बन सकी। इससे डीएमके काफी नाराज हो गई और उसने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप लगाया।
डीएमके के सपोर्ट से कैसे पास हो सकता है बिल?
डीलिमिटेशन बिल संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया से गुजरेगा, जिसकी वजह से इसे पास करने के लिए दो तिहाई संख्या की जरूरत होगी। इस बिल के पक्ष में पिछली बार 298 सांसदों ने वोट किया था। मई में बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के 20 सांसद ममता बनर्जी के गुट से टूट गए और एनसीपीआई में विलय कर लिए, जिससे यह संख्या बढ़कर 318 पहुंच गई। इसके अलावा, शिवसेना यूबीटी के छह सांसद शिवसेना शिंदे गुट में चले गए। इससे संख्या बढ़कर 324 हो गई है। अब डीएमके का रुख काफी अहम माना जा रहा है। डीएमके के पास इस समय 22 सांसद हैं। दो तिहाई के लिए लगभग 360 सांसदों की जरूरत होगी। अगर डीएमके तैयार हो जाती है तो संख्या बढ़कर 346 हो जाएगी। वहीं, सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की एनसीपी एसपी भी एनडीए में शामिल हो सकती है। एनसीपी एसपी के पास आठ सांसद हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 354 हो सकती है। वहीं, कुछ सांसद या छोटी पार्टियां गैर हाजिर रहकर जरूरी दो तिहाई के आंकड़े को कम कर सकती है, जिससे यह बिल पास हो सकता है। ऐसे में डीएमके का बिल को सपोर्ट करना बहुत जरूरी है।

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