सुपोषित छत्तीसगढ़ परिदृश्य एवं चुनौतियां विषय पर संभाग स्तरीय संगोष्ठी
जगदलपुर
पोषण माह 2021 के रूप में 1 से 31 सितम्बर तक मनाए जा रहे पोषण कार्यक्रम के तहत बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में सुपोषण छत्तीसगढ़ परिदृश्य एवं चुनौतियां विषय पर संभाग स्तरीय एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा कंगाले ने कहा कि पोषण अभियान के माध्यम से जन मानस को जोड़कर कुपोषण को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। पोषण के प्रति समाज में जागरूकता की कमी है इसे दूर कर महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण के स्तर में कमी लाने हेतु विभाग सतत कार्य कर रही है। गर्भवती माताओं को पोषण आहार का सेवन हेतु प्रेरित करने से मातृ मुत्यु दर में कमी आई है, साथ ही बच्चों को भी सशक्त बनाया जा रहा है। बस्तर संभाग में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कई नवाचार किए गए है। साथ ही पोषण अभियान में 17 विभागों के समन्वय से कार्य किया जा रहा है।
श्रीमती कंगाले ने कहा कि कोरोना काल में प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों सुनियोजित तरीके से पुन: खोला गया। आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं ने कोरोना काल में काटेक्ट टेऊेसिंग के कार्य में स्वास्थ्य विभाग के साथ काम करते हुए सर्दी-खासी वाले 4 लाख व्यक्तियों की पहचान करे हैं। साथ ही कोरोना काल में हितग्राहियों के घरों में रेडी-टू ईंट और गर्म भोजन की सामाग्री पहुंचाई है और वजन त्यौहार आयोजन कर कुपोषित बच्चों का पहचान किया गया, जो की काबिले तारिफ है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले में पोषण हेतु रागी खाद्य पदार्थ का उपयोग, कोण्डागांव में कुपोषण में कमी तथा बस्तर जिले में एनआरसी पर अच्छा काम हुआ है। इस संगोष्ठी के माध्यम से विभाग के अधिकारी-कर्मचारी में नई ऊर्जा का संचार किया जाना है।
इस अवसर पर आयुक्त जीआर चुरेन्द्र ने कहा कि बस्तर संभाग में पोषण वाटिका का उपयोग कुपोषण को दूर करने में किया जा रहा है। समय की मांग के आधार पर किचन गार्डन, पोषण वाटिका, घरों में फलदार पौधे, मुनगा, पपीता आदि का विकास करना जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, सिविल सेंस पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी का लाभ बस्तर को होगा। कुपोषण को दूर करने के लिए विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को दृढ़ इच्छा शक्ति, समर्पण भाव के साथ अपने पदीय दायित्व के प्रति सजग रहना होगा। वर्तमान में परिवार की महिलाएं अपने गृह कार्य में इतने व्यस्त होते हैं, कि उन्हें पता ही नहीं चलता की वे बीमारियों से घिर गई है। परिवार महिलाए यदि कुपोषित होंगी तो इसका असर आने वाले बच्चों में भी होता है। इसलिए परिवार में सभी सदस्यों को अपना दायित्व निभाना चाहिए। कमिश्नर चुरेन्द्र ने संयुक्त जिला कार्यालय में आयोजित महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रदर्शनी की सराहना की।
इस अवसर पर कलेक्टर रजत बंसल ने कहा कि कुपोषण से लड?े में हम सब सहभागिता जरूरी है। कुपोषण को दूर करने में सामाजिक क्रांति के रूप कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के माध्यम से कुपोषित एवं एनीमिक महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है। इस संगोष्ठी का उपयोग अपने विचारों को साझा करने का अच्छा अवसर है। बस्तर जिले में कुपोषण को दूर करने में विभागीय कर्मचारियों के साथ-साथ युवोदय की टीम कार्य कर रही है। युवोदय के स्वयंसेवक ने ग्रामीण स्तर पर विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर ग्रामीण व्यवस्था के अनुरूप जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर पोषण वाटिका की व्यवस्था बनाई है। पोषण वाटिका में लगे सब्जी-भाजी और फल का उपयोग आंगनबाड़ी के हितग्राही कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा आयोजित दू पाईडिल सुपोषण बर अभियान के माध्यम से कुपोषण के प्रति जागरूकता अभियान किया गया था।

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