मंगलवार को रिटायर हो रहे डीजी राजीव टंडन, DG बनने तेज हुई दौड़
भोपाल
लोकायुक्त पुलिस के डीजी बनने के लिए कई अफसरों ने प्रयास तेज कर दिए हैं। लोकायुक्त डीजी राजीव टंडन 31 मई को रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह पर नया डीजी कौन होगा, इसे लेकर तमाम अटकले चल रही है। यहां पर डीजी का पद पाने के लिए एडीजी रेंक के अफसर कोशिश में लगे हुए हैं। संभवता राज्य शासन मंगलवार को यहां पर नए डीजी को पोस्ट कर देगी।
सूत्रों की मानी जाए तो डीजी लोकायुक्त बनने की दौड़ में वर्ष 1989 बैच के दो अफसर प्रयास कर रहे हैं। सीआईडी के एडीजी जीपी सिंह और चंबल एडीजी राजेश चावला की मुलाकात लोकायुक्त एनके गुप्ता से हो चुकी है। वहीं एडीजी स्पेशल टास्क फोर्स विपिन माहेश्वरी का नाम भी इस पद के लिए तेजी से चल रहा है। बताया जाता है कि माहेश्वरी भी लोकायुक्त से मिल चुके हैं। इन तीन अफसरों के अलावा दो और अफसरों ने लोकायुक्त से इसी संबंध में मुलाकात की है।
स्पेशल डीजी के मना करने से फंसा पेंच
बताया जाता है कि एक स्पेशल डीजी के इस पद पर पदस्थापना से मना करने पर अब पेंच फंस गया है। शासन यहां पर पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमेन कैलाश मकवाना को पदस्थ करना चाहता था। इस संबंध में जब मकवाना से राय मांगी गई तो उन्होंने लोकायुक्त में जाने से मना कर दिया। उनके मना करते ही बाकी के अफसर इस पद पर पदस्थ होने के लिए सक्रिय हो गए।
बिना लोकायुक्त की इच्छा के बनाना होगा मुश्किल
लोकायुक्त डीजी बनाने से पहले सरकार लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता की भी राय लेगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण राय उनकी ही होगी। उनके पास तीन-चार अफसरों के नाम और उनका रिकॉर्ड भेजा जा सकता है। जिसमें से वे जिस पर सहमति देंगे, उसे बनाने पर सरकार विचार कर सकती है। यह भी हो सकता है कि लोकायुक्त संगठन की ओर से ही किसी अफसर के नाम दे दिया जाए, तो सरकार उस अफसर को भी पदस्थ कर सकती है।
कुछ दिन खाली भी रह सकता है पद
सूत्रों की मानी जाए तो अभी लोकायुक्त डीजी बनाए जाने को लेकर लोकायुक्त ने अपनी राय नहीं दी है, जिसके चलते सरकार भी अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं कर सकी है। इससे यह भी माना जा रहा है कि फिलहाल केपी वाईफे को ही यहां पर कुछ दिन डीजी का चार्ज दिया जा सकता है। वहीं यदि विपिन माहेश्वरी को यहां पर बतौर डीजी पदस्थ किया गया तो केपी वाईफे का तबादला करना होगा। दोनों ही अफसर वर्ष 1990 बैच के हैं।

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