लोकतंत्र सेनानी के त्याग को भुलाया नहीं जा सकता : आर्य
( बद्री वर्मा )
महिदपुर । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र की हत्या कर 25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा की थी।
वह भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन था। भारत के तमाम विपक्षी संगठनो के पदाधिकारियो व कार्यकर्ताओ को आपातकाल के दौरान मीसा के अंतर्गत गिरफ्तार कर जेल में नजरबंद कर दिया। उनको अनेक यातनाए देकर प्रताड़ित भी किया गया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता , प्रेस की आजादी को छीन लिया गया था। रातो रात प्रेस के कार्यालयो की विद्युत कटौती की गई।
समूचे देश में लाखो नौजवान युवा कार्यकर्ताओ को जेल में बंद कर तानाशाही रवैया अपनाकर अनेक यातनाए दी गई। अनेको परिवार प्रताड़ित होकर बर्बाद हो गए तो कई परिजन भुख प्यास से मोक्ष को प्राप्त हुए।
उसी काले दिवस की वर्षगांठ पर विगत रविवार को जिला पंचायत सदस्य प्रताप सिंह आर्य ने नगर के भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानीगण भागीरथ शर्मा , कांतिलाल राठी , नरेन्द्र चौधरी , धर्मचंद कोचर का साफा बांधकर शाल श्रीफल से सम्मान किया ।
इस अवसर पर प्रताप सिंह आर्य ने कहा की मीसाबंदी लोकतंत्र सेनानीगण हमारी नीव के पत्थर है, उनके त्याग, तपस्या और समर्पण को भुलाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र की रक्षा के लिए मीसा के दौरान उन्होने जेल में बंद रहकर अनेक प्रकार की यातनाओं को सहन कर देश में लोकतंत्र को जीवित रखा। हम युगों युगों तक उनके त्याग और बलिदान को भूल नहीं पाएंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी ओम सोलंकी , गिरधारीलाल उथरा , अर्जुनसिंह ठाकुर , विजय सारड़ा , कमल राठी , जिला पंचायत सदस्य प्रताप सिंह आर्य , कुलदीप पंजाबी , शभुसिंह तवँर , कैलाश राठी , अंकित जायसवाल, सौदान सिंह, रामनिवास, विजय सोनी , लोकतंत्र प्रहरी स्वस्तिक चौधरी , पियूष राठी , ओम सोनी , हरिओम शर्मा आदि उपस्थित थे ।

पाठको की राय