Thursday, October 22nd, 2026

सरकारी कर्मियों के खिलाफ मुकदमे के लिए मंजूरी पर 6 महीने के भीतर फैसला करें: Karnataka High Court

बेंगलुरु,
 कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक पंचायत के पूर्व कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ 24 आपराधिक मामलों में एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया है क्योंकि इनमें से किसी भी मामले में सक्षम प्राधिकार द्वारा मंजूरी नहीं ली गई थी।

इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने प्राधिकारों को निर्देश दिया कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए किए गए अनुरोधों पर वे छह महीने के अंदर फैसला करें।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘संबंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा निर्णय नहीं लेने पर उत्पन्न होने वाली इस तरह की मुकदमेबाजी के मद्देनजर… मुझे यह उचित लगता है कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी जांच एजेंसी के अनुरोध पर छह महीने की अधिकतम सीमा के साथ फैसला करेंगे, क्योंकि केवल मंजूरी के अभाव में, भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में भी कार्यवाही रद्द कर दी जाती है।’’

एम. एस. फनीशा राज्य के हासन जिले के अरकलागुडु तालुक पंचायत के कार्यकारी अधिकारी थे। वह अभी तवरदेवराकोप्पलु में वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में काम कर रहे हैं। जब वह 2009-10 में पंचायत अधिकारी थे, तब अरकलागुडु में मनरेगा कार्य हुए थे। आरोप था कि फनीशा ने संबंधित विभागों से मंजूरी के बिना कार्य कराए जिससे सरकार को नुकसान हुआ।

पांच साल की जांच के बाद 2016 में, 24 मामलों में उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किए गए थे। इसके साथ ही विभागीय जांच भी शुरू की गई और जांच अधिकारी ने 2020 में कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं हुए और सरकारी कोष को कोई नुकसान नहीं हुआ।

इसके आधार पर, फनीशा ने आपराधिक मामलों के खिलाफ 2022 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने 24 आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई की और हाल में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि फनीशा के खिलाफ दायर 24 मामलों में से किसी में भी सक्षम प्राधिकारी से लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी नहीं ली गई थी।

 

 

#Karnataka High Court

Source : Agency

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