Wednesday, October 21st, 2026

दमोह उपचुनाव : मतदाताओं की अभूतपूर्व चुप्पी ने बढ़ाई उम्मीदवारों की धड़कनें

भोपाल
प्रदेश में हो रहे दमोह विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार का शोर थम गया है। कल क्षेत्र के 249890 मतदाता 359 मतदान केंद्रों में मतदान कर सकेंगे। इस बार मतदान का समय 1 घंटा बढ़ाकर सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे कर दिया गया है। प्रशासन ने चुनाव की तैयारी पूरी कर ली है। चुनाव लड़ रहे 22 प्रत्याशी भी अपना जनसंपर्क जारी रखे हुए हैं और मतदाताओं के घरों में दस्तक दी जा रही है। यह उपचुनाव कांग्रेस के विधायक  के पार्टी और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद हो रहा है।

कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता अजय टंडन को और भाजपा ने दल बदल कर पार्टी में आए पूर्व विधायक राहुल सिंह लोधी को अपना उम्मीदवार बनाया है। अब तक के चुनाव प्रचार अभियान का अवलोकन करने और प्रत्याशियों के समर्थकों की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि  क्षेत्र में परंपरागत प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों के बीच ही सीधा मुकाबला है। मतदान के पहले तक क्षेत्र के मतदाताओं की अभूतपूर्व चुप्पी से चुनाव में हार जीत का अनुमान लगाने वाले राजनीतिक पंडितों को भी चिंता में डाल दिया है। ऐसे में बढ़-चढ़कर हार जीत का दावा करने वाले उम्मीदवारों , समर्थको की धड़कने  बढी हुई है।

 कई परिस्थितियां कांग्रेस प्रत्याशी के अनुकूल है तो कुछ मुद्दे भाजपा के पक्ष में दिखाई देती है। ऐसी दशा में अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि आखिर दमोह का ऊंट किस करवट बैठेगा ।

यह है हार जीत का पैमाना    
दमोह क्षेत्र में तीसरी ताकत के रूप में बसपा भी खासा प्रभाव रखती है। किंतु इस चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारा गया है जिसका सीधा लाभ कांग्रेस प्रत्याशी को मिलता दिख रहा है। किंतु पड़ोस की ही बसपा विधायक रामबाई भाजपा के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रही है। इससे चुनावी समीकरण गड़बड़ा गया है। क्षेत्र से भारतीय शक्ति चेतना पार्टी प्रत्याशी उमा सिंह लोधी का प्रभाव भी अभी से दिखाई दे रहा है। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी के चचेरे भाई वैभव सिंह लोधी भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं इससे  भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी को मिलने वाले जातिगत वोटों का बंटवारा संभव है। पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके पुत्र सिद्धार्थ का फैक्टर भी पूरे उपचुनाव में प्रभावी है। क्षेत्र में मलैया परिवार का वर्षों पुराना दबदबा और प्रभाव है।

मलैया पहले रूठे थे , फिर घर में खुद को कैद कर लिया  । इसके बाद पार्टी नेताओं के बढ़ते दबाव और मनुहार के बाद चुनाव प्रचार के लिए बाहर निकले। वह अपने समर्थकों को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कितना खड़ा कर पाने में सफल हुए , यह आने वाला वक्त ही बताएगा। उनके समर्थक मतदान के पहले दिन तक भी स्वयं को उपेक्षित महसूस करते रहे। वहीं दूसरी तरफ बिकाऊ और टिकाऊ के नारे के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व एकता दिखाई देती रही। क्षेत्र में बाहर से आए नेताओं के हाथों में कमान होने के कारण क्षेत्रीय भाजपा नेता कई मायने में स्वयं उपेक्षा के शिकार मानते रहे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश संगठन के मुखिया सांसद वीडी शर्माने पूरी ताकत झोंक कर यह स्पष्ट कर दिया कि दमोह उप चुनाव जीतना पार्टी के लिए कितना मायने रखता है।

 वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ,दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के सैकड़ों नेताओं ने चुनाव प्रचार अभियान में जुटकर पार्टी के लिए इस सीट को बरकरार रखने में कोई कसर बाकी नहीं रखी । शहरी और ग्रामीण मतदाताओं की बात करे तो स्पष्ट है कि कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन के दमोह शहर से होने के कारण उन्हें यहां से ज्यादा समर्थन मिल सकता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें मतदाताओं की बेरुखी का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा प्रत्याशी राहुल लोधी के पब्लिक फ्रेंडली नहीं होने से पार्टी को कई क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाजपा ने दमोह में मेडिकल कॉलेज ,पंचनगर और समधरू सिंचाई परियोजना के साथ में सुनार -बेतवा लिंक के जरिए नल जल परियोजना को क्षेत्र के बदलाव और विकास में मील का पत्थर बताने का प्रयास किया। लेकिन अभी तक अपेक्षित विकास की बाट जो रहे क्षेत्र के मतदाताओं को  कितना पसंद आया,यह बात 2 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस बीच मतदान के पहले ही क्षेत्र के कई गांव में बिजली ,पानी ,सड़क और कई अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर चुनाव बहिष्कार के बोर्ड भी दिखाई देने लगे है। दमोह शहर में भी भाजपा के चुनाव प्रचार के दौरान कुछ संगठनों के विरोध प्रदर्शन का सामना हुआ है।

रोड शो का स्थगन
एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा प्रत्याशी राहुल लोधी के पक्ष में किए जाने वाले रोडशो स्थगित करने को भाजपा की रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। प्राय: प्रत्येक चुनाव में भाजपा की बूथ स्तर पर जोरदार तैयारी होती है। इस बार भी व्यवस्था को चाक-चौबंद की जा रही है लेकिन भाजपा के दो बड़े नेताओं के रोड शो से इन तैयारियों में शिथिलता आ सकती थी  ।

टंडन, मिश्रा सहित कई संक्रमित
कोरोना संक्रमण के लगातार विकराल होते स्वरूप के बावजूद दमोह विधानसभा उपचुनाव प्रचार के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करना चिंता का विषय है। कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन ,जिला कांग्रेस  अध्यक्ष मनु मिश्रा सहित भाजपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता इस दौरान संक्रमित हो गए हैं। अजय टंडन जबलपुर के एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं और उप चुनाव की कमान उनकी पुत्री पारुल के हाथों में है।

 

#दमोह उपचुनाव

Source : Agency

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