Thursday, October 22nd, 2026

रेल हादसों से बाघ-तेंदुओं को बचाने बनेंगे कॉरिडोर

भोपाल
वन क्षेत्रों से गुजरने वाली रेल पटरियों पर बाघ, तेंदुए जैसे अन्य वन्य प्राणियों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाने के लिए रेलवे और वन विभाग कॉरिडोर बनाएगा। ये छोटे छोटे कॉरिडोर वन्य प्राणियों को रेल हादसों से बचाने में मददगार साबित होंगे। इसके पहले इस प्रकार के जंगलीय क्षेत्रों में विभाग की ओर से पटरियों के पास फेंसिंग का काम किया जा रहा है लेकिन इससे वन्य जीवों का रास्ता पूरी तरह से रुकने की संभावना है ऐसे में उनका विचरण क्षेत्र घट सकता है। इसी से बचने के लिए छोटे छोटे कॉरिडोर की योजना सामने आई है। गौरतलब है कि बरखेड़ा-बुदनी रेलखंड में ही पांच साल के भीतर 10 से अधिक वन्यप्राणियों की मौत रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आकर हो चुकी है। इनमें बाघ, तेंदुए, भालू, नीलगाय आदि शामिल हैं।

भोपाल-इटारसी रेल मार्ग रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरता है। इसकी सीमा बरखेड़ा से बुदनी के बीच लगती है। यहां जंगल के भीतर से दो रेल लाइनें गुजरती थीं। रेल लाइन के दोनों हिस्सों मे घना जंगल है। जिसमें प्राकृतिक जल स्रोत है। बाघ-तेंदुए समेत दूसरे वन्यप्राणी अपने रहवास स्थल में ट्रैक पार करके एक से दूसरी तरफ आना-जाना करते हैं। खासकर गर्मी के दिनों में जंगल में पानी खत्म हो जाता है और प्राकृतिक जल स्रोत ट्रैक के दोनों और सीमित है इसलिए वन्य प्राणी रेलवे लाइन पार करते हैं। इस तरह के कई अन्य भी रेल मार्ग हैं।

ट्रेन की गति कम करने का प्रस्ताप रद्द होने के बाद फेंसिग का काम किया जा रहा है। बीते एक साल से काम भी चालू है। इसे दो सालों में पूरा किया जाना है।  वन विभाग ने रेलवे को पहले तो ट्रेनों की रफ्तार कम करने का प्रस्ताव दिया था। रेलवे ने इससे इन्कार कर दिया, क्योंकि ट्रेनों को घाट सेक्शन होने की वजह से कम रफ्तार से नहीं चलाया जा सकता। ऐसा किया गया तो ट्रेन परिचालन में दिक्कत आ सकती है। इसके बाद फेंसिग का काम किया गया। 

 

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Source : Agency

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