कलेक्टर ने सीहोर में मच्छरों पर नियंत्रण के लिए कारगर उपाय, तैयार हो रही 60 हजार से ज्यादा 'आयल बाल'
सीहोर
जिले में डेंगू-मलेरिया पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर प्रवीण सिंह की पहल पर आयल बॉल को बनाकर हथियार, मलेरिया डेंगू को भगाएंगे। इस बार अभियान 16 जुलाई को पूरे जिले में एक साथ शुरू किया जाएगा। कलेक्टर सिंह ने बताया कि ठहरे हुए पानी में मलेरिया और डेंगू के मच्छरों के लार्वा नियंत्रण के लिए आयल बॉल सबसे सस्ता और कारगर उपाय है। उन्होंने बताया कि जिले के ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्र में अभियान के रूप में 16 तारीख को एक साथ पूरे जिले में ठहरे हुए पानी में 60 हजार से अधिक आयल बॉल डाली जाएंगी। उन्होंने बताया कि आयल बॉल लकड़ी के बुरादे, खराब आयल और अनुपयोगी कपड़ों से तैयार की जाती है।
60 हजार से अधिक आयल बॉल की जा रही है तैयार
कलेक्टर प्रवीण सिंह ने बताया कि मच्छरों की बढ़ती संख्या के नियंत्रण लिए 16 जुलाई को पूरे जिले में आयल बॉल को बनाकर हथियार मलेरिया डेंगू को भगाएंगे। इस बार अभियान को मूर्त रूप देने के लिए 60 हजार आयल बाल तैयार की जा रही हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 100-100 आयल बॉल तैयार करने का कार्य तेज गति से चल रहा है। जिले की 542 ग्राम पंचायतों में 54 हजार से अधिक तथा जिले की सभी नगरीय क्षेत्रों में छह से अधिक आयल बॉल बनाने का काम तेजी से चल रहा है
इस तरह बनाई जाती है आयल बॉल
कलेक्टर सिंह ने बताया कि वर्षा काल में मच्छर जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए व मच्छरों की बढ़ती संख्या को नियंत्रण के लिए जले हुए तेल, मोटरआयल से निर्मित बाल बनाई जाती है। यह बॉल लकड़ी के बुरादे को सूती कपड़े में लपेटकर और फिर जले हुए तेल में भिगोकर बनाई जाती है। इस बाल को जहां भी पानी भरा हुआ हो जैसे गड्ढों में, नाले में, खाली प्लाट में या ऐसी सभी जगह जहां पानी की निकासी लम्बे समय तक न हो सके वहां पर फेंका जाता है।
ऐसे काम करती है आयल बॉल
लकड़ी के बुरादे, सूती कपड़े और जले हुए तेल से तैयार की गई आयल बाल गड्ढों में, नाले में, खाली प्लाट में या ऐसी सभी जगह जहां पानी की निकासी लम्बे समय तक न हो सके वहां पर डाला जाता है। आयल बॉल से तेल निकल कर पानी के पूरे सतह को कवर कर लेता है, जिससे मच्छर के किसी भी प्रकार के लार्वा को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिससे वह पनप नहीं पाता है।
16 जुलाई को डाली जाएगी आयल बॉल
कलेक्टर सिंह ने बताया कि 16 जुलाई को समस्त ग्राम पंचायतों व शहरी क्षेत्रों में सुबह 10 बजे से अभियान के रूप में प्रारंभ किया जाएगा तथा 15 दिवस के बाद इस प्रक्रिया को पुनः दोहराया जाएगा। ग्राम पंचायत तथा नगरीय निकायों का अमला आयल बॉल का निर्माण कर ठहरे हुए पानी में डालेगा।

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