Monday, October 19th, 2026

कलेक्टर मनोज पुष्प के कठिन वक्त पर भी कर्तव्य से नहीं डिगे पैर, मां को कंधा दे आॅक्सीजन मैनेजमेंट में जुटे

भोपाल
मां नहीं रही, अगर कोई यह सूचना फोन पर या व्यक्तिगत तौर पर दे तो किसी का भी संयम डोल सकता है और वह सारे काम छोड़कर मां की अंतिम यात्रा की तैयारी में जुट जाता है लेकिन इन सबसे परे मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प ने मानवता की सेवा को तवज्जो दी और कोरोना महामारी से जूझ रहे लोगों को उपचार की व्यवस्था को प्राथमिकता में रखा। जब व्यवस्था संबंधी काम हो गया तो घर जाकर मां की अंतिम यात्रा की तैयारी की और अंतिम संस्कार किया। इसके बाद भी वे रुके नहीं और कोरोना मरीजों को आक्सीजन की कमी की सूचना मिलने पर आक्सीजन मैनेजमेंट में जुट गए।

मंदसौर कलेक्टर मनोज पुष्प की मां उनके साथ ही रहती थीं। छह माह पहले उन्हें स्ट्रोक आया था, तब दवाओं से उनकी स्थिति सुधर गई थी लेकिन पिछले एक माह से वे सीवियर थीं। उनकी स्थिति कभी भी सीरियस हो जाती थी लेकिन पुष्प बेटे के साथ मंदसौर के कलेक्टर की जिम्मेदारी निभाने में पीछे नहीं रहे। बीते दिनों जब मंत्री हरदीप सिंह डंग के साथ कोरोना संक्रमण रोकथाम को लेकर वे सर्किट हाउस में बैठक कर रहे थे तब मां को वेंटिलेटर पर ले जाने की सूचना मिली। इसके बाद उज्जैन संभागायुक्त संदीप यादव के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर रहे थे तभी पत्नी विनीता मैसेज आया कि मम्मी नहीं रहीं।

पुष्प ने काम को प्राथमिकता देते हुए बैठक पूरी होने का इंतजार किया और इसके बाद घर में जाकर मां स्नेह प्रभा को बेड से उतारा, अर्थी सजाई। गार्ड, प्यून आदि के साथ शव वाहन से श्मशान पहुंचे और उन्हें अंतिम विदाई दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में होस्टल में रह रही बेटी वदानिया से लेकर सतना, रीवा से आने वाले रिश्तेदारों को भी मना कर दिया था। तेरह दिन के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम को भी काम के आगे छोड़ा। साथ ही लोगों से शोक जताने के लिए घर आने के लिए भी मना किया और फोन पर ही सबसे बात कर रहे हैं।

मां के अंतिम संस्कार से लौटे कलेक्टर पुष्प को वायरलेस और मोबाइल पर अस्पतालों में आॅक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिली। इसके बाद वे राजस्थान के सीमावर्ती जिलों, रतलाम आदि से आॅक्सीजन जुटाने में लग गए। जहां से भी व्यवस्था हुई पहले उन मरीजों तक पहुंचाए जिनके सिलेंडर खत्म होने को थे।

 

#कलेक्टर मनोज पुष्प

Source : Agency

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