Friday, October 23rd, 2026

क्रिश्चन समुदाय ने राजनीतिक पार्टियों से मांगा पांच सीट पर प्रत्याशी

रायपुर

छत्तीसगढ़ में पहली बार क्रिश्चन समुदाय के लोगों ने अपनी परेशानियों को लेकर पत्रकारों के समक्ष आए और राजनीतिक पार्टियों से जगदलपुर, सरगुजा, बिलासपुर, राजनांदगांव और कोरिया की सीट से एक-एक प्रत्याशी घोषित करें ताकि वे जब जीतकर आएं क्रिश्चन समुदाय के परेशानियों को दूर करें।

भाजपा शासन काल के दौरान अल्पसंख्यक आयोग में क्रिश्चन समुदाय का एक प्रतिनिधि जरुर होता था लेकिन कांग्रेस की सरकार आने के बाद से अब तक कोई भी प्रतिनिधि शासन व प्रशासन में नहीं है इस कारण समुदाय के लोग अपनी परेशानियों को दबाकर बैठे थे लेकिन आगामी दिनों होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत जरुर दिखाएंगे। अगर कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों इन सीटों पर प्रत्याशी घोषित करती है वे प्रचार-प्रसार करने जरुर जाएंगे, अगर नहीं करती है तो वे चुनाव का तो बहिष्कार नहीं करेंगे लेकिन एक करोड़ 9 लाख लोग मतदान के दौरान नोटा का जरुर उपयोग करेंगे।

सेंट मेरी चर्च की अनुषा जोसेफ, छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फेलोशिप दुर्ग के अध्यक्ष राकेश प्रकाश, अतुल प्रशांत मसीह, डा. डायमंड फर्नाडिस, लोकेश डहरिया ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में बताया कि छत्तीसगढ़ में पहली बार दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरिया, जगदलपुर, सरगुजा, रायपुर सहित अन्य जिलों के क्रिश्चन पिछले दिनों एकत्र हुए थे क्योंकि पिछले साढ़े तीन साल शासन व प्रशान में उनका कोई भी प्रतिनिधि वहां पर नहीं है जिसके माध्यम से वे अपनी परेशानियों और दुख-पीड़ा को वहां तक पहुंचा सकें। छत्तीसगढ़ में एक करोड़ 9 लाख से अधिक क्रिश्चन निवास करते है जिनमें जगदलपुर में 35 से 40 हजार, सरगुजा में 35 से 40 हजार, बिलासपुर में 30 से 35 हजार, भिलाई में 15 से 20 हजार और रायपुर में 40 से 45 हजार शामिल है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी उन्हें सिर्फ वोट बैंक समझ रही है क्योंकि वे जानते है कि क्रिश्चन समुदाय के लोग मतदान का बहिष्कार नहीं करते है और अपने मताधिकार का जरुर प्रयोग करते है। लेकिन इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं होगा। आज पत्रकारवार्ता के माध्यम से दोनों ही राजनीतिक पार्टी को वे सचेत करना चाहते है कि उनके समुदाय से भी पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित करें साथ ही संभाग, जिला व ब्लॉक स्तर पर एक - एक प्रतिनिधि को बिठाए ताकि वे इनके माध्यम से अपनी परेशानियों को शासन-प्रशासन तक पहुंचा सकें।

अगर बात भाजपा पार्टी की करें तो उन्होंने अल्संख्यक आयोग में एक प्रतिनिध को बिठाया जरुर था लेकिन वह भी खानापूर्ति के लिए, जब क्रिश्चन समुदाय के लोग प्रतिनिधि के पास अपनी समस्याओं को लेकर जाते थे तो वह तो उनकी समस्याओं को सुन लेते थे लेकिन ऊपर तक उनकी बात नहीं पहुंच पा रही थी। बात अगर वर्तमान कांग्रेस सरकार की करें तो पिछले साढ़े तीन सालों से शासन-प्रशासन में समाज का कोई भी प्रतिनिध नही होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर कहीं पर भी कोई घटना घटित हो जाती है और उसमें क्रिश्चन समुदाय के लोगों का नाम आ जाता है पूरे छत्तीसगढ़ में रहने वाले समुदाय के लोग डर और सहम जाते थे क्योंकि उनकी बात रखने वाला शासन-प्रशासन में कोई नहीं है।

 

Source : Agency

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