श्रीलंका से कटेगा चीन का पत्ता! मुकाबले के लिए भारत की बड़ी तैयारी, समझें रणनीति
नई दिल्ली
जब इस साल की शुरुआत में श्रीलंका सात दशकों में अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब भारत ने उसकी जमकर मदद की। उस संकट के दौरान श्रीलंका में घातक दंगे हुए और ईंधन, भोजन व दवाओं की भारी कमी देखी गई। भारत ने जनवरी और जुलाई के बीच लगभग 4 बिलियन डॉलर की बेहद जरूरी सहायता प्रदान की, जिसमें क्रेडिट लाइन, करेंसी की अदल-बदली भी शामिल थी। भारत ने श्रीलंका के 2.2 करोड़ लोगों के लिए आवश्यक दवाओं से भरा अपना एक युद्धपोत भी भेजा था।
अब, जब श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2.9 बिलियन डॉलर के ऋण सौदे को हासिल करने में कामयाब रहा है और इसकी अर्थव्यवस्था भी स्थिर हो गई है। हालांकि भारत रणनीतिक रूप से अहम श्रीलंका में अपने कदमों का विस्तार करने में तेजी से लगा हुआ है। श्रीलंका में अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत महत्वाकांक्षी दीर्घकालिक निवेश करने की कोशिश कर रहा है। सरकार के मंत्री और तीन सूत्रों ने यह जानकारी दी। श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने इस महीने एक इंटरव्यू में कहा, "अभी हम (भारत की तरफ से) निवेश देख रहे हैं।" वर्तमान में चर्चा के तहत 1 बिलियन डॉलर से अधिक की परियोजनाओं का जिक्र चल रहा है जो श्रीलंका में भारत की उपस्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, "वे (भारत) जितना हो सके उतना निवेश करने को तैयार हैं।" साबरी ने कहा, "भारत संभवत: अपनी सुरक्षा चिंताओं के कारण रणनीतिक रूप से उस (निवेश) पर विचार कर रहा है।" भारत के विदेश मंत्रालय ने श्रीलंका में अपनी योजनाओं और रणनीतिक उद्देश्यों पर रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।
श्रीलंका में लंबा गेम खेलने के प्लान में भारत
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि हिमालयी सीमा पर चीन के साथ लगातार टकराव के समय क्षेत्रीय सुरक्षा हमेशा नई दिल्ली के लिए एक फोकस रहेगी। मुद्दे की संवेदनशीलता के कारण नाम नहीं बताने की शर्त पर सूत्र ने कहा, "सुरक्षा चिंताओं से कोई गुंजाइश नहीं की जा सकती है। भारत लंबे समय तक वहां टिके रहने के लिए दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।" कई अधिकारियों ने कहा कि श्रीलंका के उत्तर में नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली परियोजनाओं की स्थापना के लिए भी भारतीय निवेश की मांग हो रही है। इसके अलावा, श्रीलंका पूर्वोत्तर में त्रिंकोमाली में बंदरगाह के विस्तार और विकास पर भी नई दिल्ली के साथ काम करने का इच्छुक है।
श्रीलंका की मदद करने वाला सबसे बड़ा देश भारत
उत्तरी श्रीलंका भारत से करीब है। अगर यहां भारत परियोजनाएं शुरू करता है तो ये चीन को कड़ी टक्कर देने में मदद कर सकती हैं। चीन ने इस ओर काफी निवेश किया है। श्रीलंका का तमिल बहुल उत्तर दक्षिणी इलाका भारत के तमिलनाडु राज्य के साथ जातीय संबंध भी साझा करता है। भारत इस साल श्रीलंका की मदद करने वाला सबसे बड़ा देश था। ऐसे में ताजा वार्ता भारत के उन प्रयासों को दर्शाती है जहां वह चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने में लगा है। श्रीलंका में भारी निवेश का एक कारण यह भी है कि द्वीप राष्ट्र एशिया को यूरोप से जोड़ने वाले व्यस्त जलमार्गों से कुछ ही दूरी पर स्थित है। ऐसे में भारत हर हाल में उस तरफ अपना प्रभाव बरकरार रखना चाहेगा।
श्रीलंका में आर्थिक संकट के समय से भी लगा है भारत
जून के अंत में, एक पखवाड़े पहले जब हजारों नाराज श्रीलंकाई सड़कों पर उतरे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश से भागने के लिए मजबूर किया, तब भारत के शीर्ष राजनयिक कई बैठकों के लिए द्वीप राष्ट्र के मुख्य शहर कोलंबो में पहुंचे गए। भारत के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने भी राजपक्षे और प्रधान मंत्री रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात की। श्रीलंकाई नेतृत्व के साथ अपनी बातचीत में, क्वात्रा और अन्य भारतीय अधिकारियों ने चीन की स्थिति को एक प्रमुख भू-राजनीतिक चिंता के रूप में चिह्नित किया था। सूत्रों ने ये जानकारी दी। सूत्र ने कहा कि द्वीप की अर्थव्यवस्था में चीन की बड़ी भूमिका रही है और यह पिछले राजपक्षे प्रशासन के तहत तेजी से बढ़ी थी। यह भारत को किसी भी चीज से ज्यादा परेशान कर रही थी। अब भारत चीन को काउंटर करने के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार है।

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