Thursday, October 22nd, 2026

CPEC पर हमले से तिलमिलाया चीन, भारत और अमेरिका पर भी निकाली खीझ

नई दिल्ली
चीन कभी खूंखार आतंकी मसूद अजहर के लिए ढाल बन जाता है तो कभी उसका प्यार तालिबान पर उमड़ जाता है। लेकिन आज अचानक चीन ने आतंकवादियों और उनके समर्थकों को अपना दुश्मन बताया है। कुछ अजीब लगा? ठहरिए, चीन को सभी आतंकियों से दिक्कत नहीं, उसे तो गुस्सा सिर्फ उन दहशतगर्दों पर है, जिन्होंने एक बार फिर उसके अरबो डॉलर के चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरीडोर (CPEC) पर धमाका किया है। बलोचिस्तान आर्मी लिब्रेशन (BLA) की ओर से किए गए इस हमले को लेकर उसने पाकिस्तान को तो दोष दिया ही है, भारत और अमेरिका पर भी खीझ निकाली है। शुक्रवार को पाकिस्तान के ग्वादर में चीनी इंजीनियरों के काफिले को निशाना बनाकर फिदायीन हमला किया गया, जिसमें दो पाकिस्तानी बच्चों के मारे जाने की खबर है, जबकि एक चीनी नागरिक सहित कई घायल हुए हैं। बीएलए ने हमले की जिम्मेदारी ली है। चीन ने शनिवार को पाकिस्तान को फटकार लगाई तो सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि आतंकी और उसके समर्थक चीन के दुश्मन हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा है कि बलोचिस्तान चीनी नागरिकों के लिए सबसे खतरनाक प्रांत और पिछले कुछ सालों में यहां कई आतंकी हमले हुए हैं। बता दें, CPEC चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्ट बेल्ट एंड रोड (BRI) इनिशिटिव का हिस्सा है और बलोचिस्तान से होकर गुजरता है। अखबार ने लिखा है कि बलोचिस्तान के नागरिकों की चीन से कोई दुश्मनी नहीं थी, लेकिन पाकिस्तान की केंद्रीय सरकारों के प्रति नकारात्मक धारणा की वजह से उन्होंने आतंकी संगठन बना लिए। पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने चीनी नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ग्लोबल टाइम्स ने इन हमलों को लेकर भारत और अमेरिका पर भी खीच उतारी और बिना सिर पैर के आरोप जड़ दिए। अखबार लिखता है कि पाकिस्तान में कुछ आतंकी संगठन BRI को निशाना बना रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों की ओर से भड़काया जा रहा है। अमेरिका और भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियां चीन की उन्नति को रोकने के लिए BRI को निशाना बना रही हैं। 

तालिबान से मांगी मदद
संपदाकीय में तालिबान को अफगानिस्तान की नई सरकार बताते हुए कहा गया है कि उन्हें उन आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो अफगानिस्तान में पनपे और अब पाकिस्तान में एक्टिव हैं। चीन का अफगानिस्तान की नई सरकार को लेकर नजरिया इसी पर आधारित होगा। ध्यान देने की बात यह है कि अखबार ने यह नहीं लिखा है कि सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ एक्शन लिया जाए।
 

 

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Source : Agency

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