गमक के तहत "चारबैत और शाम ए ग़ज़ल" कार्यक्रम
भोपाल
"आजादी का अमृत महोत्सव" के अंतर्गत उर्दू अकादमी द्वारा गमक श्रृंखला के तहत "चारबैत और शाम ए ग़ज़ल" ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विहान ड्रामा ग्रुप की महिला कलाकारों द्वारा चारबैत की प्रस्तुति और ग्वालियर की ग़ज़ल गायिका अंशिका चौहान ने ग़ज़ले पेश की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वाजिद खान ने किया। प्रस्तुतियों का लाइव प्रसारण उर्दू अकादमी के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर किया गया।
अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने बताया कि चारबैत शायरी की एक विधा है जिसके प्रत्येक बंद में 4 पंक्तियां होती हैं। उर्दू अकादमी ने चारबैत पार्टी तैयार की है, जिनके कलाकारों में श्वेता केलकर, तेजस्विता अनंत, निवेदिता सोनी, ईशा गोस्वामी, सृष्टि भागवत और व्याख्या चौहान शामिल हैं।
कार्यक्रम में चारबैत के कलाकारों ने "मुस्कुराकर किसने देखा, ये न थी हमारी किस्मत के विसाल ए यार होता", "आलम में तो हर सिम्त बहार और हमें तो शाम-ए-नगम में काटनी है", की प्रस्तुति दी। अंशिका चौहान ने निदा फाजली की गजल "तुम ये कैसे जुदा हो गए", बशीर बद्र की "कभी यूँ भी आ मिरी आँख में" और इब्राहीम अश्क की ग़ज़ल "मुस्करा कर मिला करो हमसे", पर कलाम पेश किया।

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