Sunday, October 25th, 2026

आदेश बदलते हुए सरकार ने दी सफाई, जांच के लिए विभागों की अनुमति जरूरी नहीं

भोपाल
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जांच की जद में आए सरकारी नौकरशाहों की जांच करने के लिए अब इन जांच एजेंसियों को विभाग प्रमुख से पूर्व अनुमति लेना जरुरी नहीं होगा। लोकायुक्त संगठन की नाराजगी और इस आदेश को लेकर अफसरों को नोटिस जारी कर पेशी पर बुलवाए जाने के बाद राज्य सरकार ने अपने ही आदेश पर यूटर्न लेते हुए कहा है कि जो आदेश जारी किया था उसमें प्रक्रिया बताई गई थी ऐसा करने के कोई निर्देश नहीं थे। अब सामान्य प्रशासन विभाग इस संबंध में नये सिरे से आदेश जारी करेगा।

 राज्य सरकार ने 26 दिसंबर 2020 को एक आदेश जारी कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में धारा 17 एक जोड़े जाने के बाद पुलिस अधिकारी द्वारा शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध जांच या पूछताछ या अन्वेषण करने हेतु पुर्वानुमति जारी करने की प्रक्रिया जारी की थी। इसमें कहा गया था कि जांच एजेंसी को शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अपराध से जुड़े मामलों में जांच , पूछताछ या अन्वेषण करने के लिए अपने सभी वांछित दस्तावेजों सहित प्रतिवेदन संबंधित प्रशासकीय विभाग को देना होगा। विभाग इसका परीक्षण कर अपना स्पष्ट अभिमत देगा इसके बाद जांच एजेंसी को पूर्वानुमति मान्य अथवा अमान्य करने की सूचना दी जाएगी। जीएडी ने इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए थे।

सामान्य प्रशासन विभाग के इस निर्देश के बाद लोकायुक्त संगठन ने नाराजगी जाहिर की थी। लोकायुक्त संगठन की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों को नोटिस जारी कर कहा गया था कि हम आपके इन निर्देशों को नहीं माने तो क्या होगा। इस पर सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों को पेशी पर भी बुलाया गया।

लोकायुक्त की नाराजगी दूर करने सामान्य प्रशासन विभाग ने बीच का रास्ता निकाला और अब अपने ही आदेश को लेकर सफाई दी कि 26 दिसंबर 2020 को जारी आदेश  में भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 की धारा 17-ए  जोड़े जाने के बाद राज्य सरकार ने केवल जांच की प्रक्रिया तय की थी। इसमें जांच के लिए अनिवार्यत: पूर्वानुमति प्राप्त करने के कोई निर्देश नहीं दिए गए। इस आदेश के जरिए यह कहा गया था कि ऐसे प्रकरण जिनमें संबंधित पुलिस अधिकारी, अन्वेषण एजेंसी जांच करने की पूर्वानुमति प्रात करना जरुरी समझती हो ऐसी पूर्वानुमति देने की प्रक्रिया का उल्लेख जीएडी ने किया था।

सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने 26 दिसंबर 2020 और 6 जनवरी 2021 के आदेशों को अधिक्रमित कर इस विषय पर स्पष्ट निर्देश अलग से जारी करने का निर्णय लिया है। लोकायुक्त की नाराजगी दूर करने अब सरकार ने पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके चलते अब लोकायुक्त संगठन और ईओडब्ल्यू अब शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना विभाग की अनुमति लिए ही नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकेंगे। सरकार ने भी फिलहाल इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

 

#Changing the order

Source : Agency

पाठको की राय