टीएमसी के नेताओं को घर में नजरबंद करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई पहुंची सुप्रीम कोर्ट
कोलकाता
सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जिसमें उसने नारदा स्कैम मामले में चार दिग्गज नेताओं (जिनमें से तीन ममता बनर्जी की पार्टी से हैं) को घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया था। सीबीआई ने नेताओं की जमानत याचिका पर आज हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई को भी टालने की मांग की है। बता दें कि चारों नेताओं की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 5 सदस्यों की बैंच गठित की गई है, जिसपर आज सुनवाई होनी है।
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने चारों नेताओं को गिरफ्तार करने के बजाय अगले आदेश तक घर पर ही नजरबंद करने का आदेश दिया था। गिरफ्तार किए गए चार नेताओं में मंत्री फिरहाद हकीम, विधायक मदन मित्रा और टीएमसी के पूर्व नेता सोवन चटर्जी शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा में शामिल होने के लिए मार्च में टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था। सभी को नारदा स्कैम मामले में आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने हाईकोर्ट से नजरबंदी के आदेश को यह कहते हुए बदलने का आग्रह किया था कि ये पावरफुल नेता हैं और गवाहों को धमका सकते हैं। सीबीआई इस मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करवाना चाहती है।
गौरतलब है कि सीबीआई पिछले हफ्ते चारों नेताओं को उनके घर से उठाकर दफ्तर ले गई थी और लंबी पूछताछ के बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। सीबीआई के फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगा दी थी।
क्या है नारदा स्कैम मामला
साल 2014 में एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ था, जिसमें पश्चिम बंगाल में निवेश के नाम पर टीएमसी के सात सांसदों, चार मंत्रियों, एक विधायक और एक पुलिस अधिकारी को एक प्रोजेक्ट के लिए नगद रुपए लेते दिखाया गया था. पश्चिम बंगाल के 2016 विधानसभा चुनाव से पहले न्यूज पोर्टल नारदा ने स्टिंग का वीडियो जारी किया था।

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