Wednesday, October 21st, 2026

उपचुनाव: दीपावली के बाद होंगे चुनाव किंतु राजनीतिक दलों की जोरदार तैयारियां शुरू

भोपाल
मध्य प्रदेश के एक लोकसभा और 3 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव दीपावली के बाद ही होंगे। केंद्रीय चुनाव आयोग ने आज पश्चिम बंगाल के तीन और ओडिसा के 1विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी किंतु मध्य प्रदेश सहित देश के किसी अन्य राज्य में उपचुनाव अभी नही होंगे ,लंबित ही रहेंगे। जहां तक मध्यप्रदेश का सवाल है केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य निर्वाचन आयोग से अभिमत चाहा था जिस पर कहा गया कि मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति से निपटने ,कोरोना के  तीसरी लहर की संभावना और लगातार धार्मिक त्यौहारो की वजह से मौजूदा परिस्थितियों में उपचुनाव कराना संभव नहीं है। इसी वजह से माना जा रहा है कि दीपावली के बाद ही उपचुनाव की घोषणा संभव है। इसके बावजूद प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के साथ ही कुछ अन्य दलों ने भी उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है।

जीत को तरस गई है कांग्रेस
कांग्रेस अपना पूरा फोकस खंडवा लोकसभा और सतना जिले के  रैगांव विधानसभा के उपचुनाव पर केंद्रित करना चाहती है। इसका मुख्य कारण यह है कि दोनों ही सीट भाजपा से छीन कर पार्टी यह बताने की कोशिश करना चाहती है कि प्रदेश में भाजपा का जनाधार लगातार कम होता जा रहा है और केंद्र व प्रदेश सरकार के कामकाज ,बढ़ती महंगाई ,बेरोजगारी महिलाओं पर अत्याचार से मतदाता त्रस्त हैं। किसके लिए पीसीसी चीफ कमलनाथ और उसकी पूरी टीम पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारियों की जमावट में अभी से ताकत झोकने लगे हैं। इन दोनों ही क्षेत्रों को भाजपा का अभेद  किला माना जाता है जहां 1-2 मौके को छोड़ दे तो पिछले तीन दशक से कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन के लिए तरस रही है। रैगांव में कांग्रेस पिछले 6 चुनाव से जीत का स्वाद चखने को बेताब  है। जबकि खंडवा में 2009 को अपवाद मान लें तो पिछले 8 चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कभी भी संतोषजनक नहीं रहा है। बता दें कि खंडवा सीट 6 बार भाजपा के सांसद रहे नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद रिक्त हुआ है जबकि रेगांव में पांच बार के विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन के बाद उप चुनाव हो रहा है।

मैदानी जमावट पर ज्यादा जोर
 कांग्रेस यह मानकर चल रहे हैं कि झाबुआ जिले के जोबट और निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर क्षेत्र कांग्रेस का परंपरागत सीट रहा है और यहां कांग्रेस के मजबूत संगठन और मैदानी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बल पर उपचुनाव में उनके प्रत्याशी की जीत आसान हो जाएगी। दूसरी ओर खंडवा और रैगांव मे न शिर्फ संगठन को मजबूत करने की जरूरत है बल्कि मैदानी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी कार्य में सक्रीय करने की आवश्यकता है। इसके लिए कमलनाथ और कांग्रेस के अन्य नेताओं  के लगातार दौरे ,संगठन स्तर पर बैठक और बूथ स्तर पर तैयारियों को बेहतर ढंग से अंतिम रूप देने की तैयारियां की जा रही है। आने वाले दिनों में इन दोनों ही क्षेत्रों में कमलनाथ के कई दौरे हो सकते हैं इसके लिए उनके कोर टीम की पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही है। खंडवा में जहां अरुण यादव के प्रत्याशी बनने की पूरी संभावना है इसलिए उन्हें और उनकी टीम को लगातार सक्रियता बनाए रखने को कहा गया है। विंध्य क्षेत्र के रैगांव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को मैदानी स्तर पर सक्रिय भूमिका में लाने पर भी विचार किया जा रहा है।

कांग्रेस उपचुनाव वाले सभी क्षेत्रों में पूर्व मंत्रियों और विधायकों के साथ ही जिला प्रभारियों और जिला अध्यक्षों को चुनावी जिम्मेदारी सौंप चुकी है .उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों के फीडबैक भी लगातार लिए जा रहे हैं। भाजपा की तैयारियों को भी कमतर नहीं माना जा रहा है। मैदानी स्तर पर पहले से मौजूद अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को बेहतर ढंग से सक्रिय दिशा देने पर पूरा जोर लगाया जा रहा है। ऐसी दशा में इन सभी क्षेत्रों में आने वाले दिनों में दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा।

 

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Source : Agency

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