बजट ने रोकी विदेश जाकर पीजी और पीएचडी की उड़ान
भोपाल
बजट के अभाव में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों का विदेश जाकर पीजी और पीएचडी कराने का सपना टूट गया है। इसलिये उच्च शिक्षा विभाग ने जुलाई में जमा होने वाले फार्म की रूपरेखा तक नहीं जमाई है, क्योंकि अभी तक राज्य सरकार द्वारा बजट आवंटित नहीं किया है। इसके चलते जनवरी में आवेदन जमा नहीं कराये गये थे।
बजट के अभाव में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कराने वाली कई योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं। गत वर्ष जनता कर्फ्यू लगने का खास असर सरकारी खजाने पर पड़ा है। इसलिए वित्त विभाग ने प्रदेश पर छाये वित्त संकट को देखते हुए सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को विदेश जाकर पीजी और पीएचडी कराने की योजना में जनवरी सत्र में आवेदन नहीं बुलाये गये। कोरोना संक्रमण खत्म हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय उडानें अभी शुरू कर दी गई हैं। वित्त विभाग ने योजना के तहत जुलाई में विद्यार्थियों पर होने वाले खर्च के लिये बजट आवंटित नहीं किया है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग अब बजट आने के बाद आगामी सत्र के लिये जनवरी में आवेदन जमा करा सकता है।
आनलाइन कराई जा रही है पढाई
दो साल पूर्व यूएसए और यूके भेजने के लिए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के आठ विद्यार्थियों का चयन किया गया था। उनका पूरा खर्च विभाग उठा रहा है। कोरोना वायरस का प्रभाव पूरी दुनिया पर छाया हुआ है। विदेश हवाई उड़ानों पर रोक लगी हुई थी। इसलिए चयनित उनकी पढाई आनलाइन कराई जा रही है। इसमें तीन विद्यार्थियों की डिग्री इस साल पूर्ण हो जाएगी। शेष पांच विद्यार्थियों की पढाई आगले साल तक पूरी होना है। उक्त विद्यार्थियों का बजट वित्त विभाग द्वारा पूर्व में जारी कर दिया गया था।
आठ लाख हुई सलाना आय का दायरा
विभाग ने पालकों की सालाना आय का दायरा पांच लाख रुपए से बढ़ाकर आठ लाख कर दिया है। तीन लाख का दायरा बढ़ने से काफी विद्यार्थी मापदंडों में खरे उतर रहे हैं। इससे आवेदनों की संख्या में इजाफा भी होगा। विभाग विदेश जाने वाले हरेक विद्यार्थी को सालान चालीस हजार यूएसए डालर स्कालरशिप के तौर पर आवंटित करेगा। वर्तमान में डालर की कीमत 76.16 रुपए है। इस हिसाब से 30 लाख 47 हजार 200 रुपए हरेक विद्यार्थी को पीजी और पीएचडी करने के लिए दिए जाएंगे।

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