Friday, October 23rd, 2026

घडिय़ाली आंसू बहाना और लाशों पर राजनीति बंद करे भाजपा - मरकाम

रायपुर
भाजपा और डा. रमन सिंह की फितरत लाशों पर राजनीति करना है, इसीलिये शायद इन्होंने अनर्गल आरोप लगाना बंद नहीं किया है। डा. रमन सिंह ये बताना चाहेंगे कि उनके शासनकाल में पंडो जनजाति के लिये क्या किया कि 15 वर्षों में भी पंडो लोगों की स्थिति में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ? क्या कारण था कि सूरजपुर के पंडोनगर के लोगों को विधानसभा चुनाव 2018 का बहिष्कार करने की घोषणा करनी पड़ी थी?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा ने सन 2017 में तब जांच टीम क्यों नहीं भेजी जब सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में थोड़े से अंतराल में ही पंडो समाज के करीब 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी जिस पर केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम को जांच करने के लिये आना पड़ा था? उस समय डा. रमन सिंह के मुंह पर ताला क्यों पड़ गया था? 2016 में वाड्रफनगर के बसंतपुर में रामकरण पंडो की मृत्यु को लेकर क्यों पूरे पंडो समाज को उग्र आंदोलन करने पर विवश होना पड़ा था, क्या डा. रमन सिंह इस पर प्रकाश डालना नहीं चाहेंगे? क्या कारण है कि पंडो समाज में भाजपा अपने शासन के 15 वर्षों में अंधविश्वास और अशिक्षा को दूर नहीं कर पायी, क्या कारण है कि पंडो समाज की मातायें बहनें वर्षों से कुपोषण का शिकार रहीं जिसके कारण एक बड़ी आबादी हिमोग्लोबिन की कमी से जूझती रही? इन प्रश्नों में से किसी का भी उत्तर डा. रमन सिंह के पास नहीं होगा लेकिन एक बात वे बखूबी करना जानते हैं, और वो है एक ऐसे संवेदनशील विषय पर कुत्सित राजनीति करना।

बलरामपुर में पंडो समाज के लोगों की मृत्यु की घटना की जांच के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव को दिये जा चुके हैं जिन्हें तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। पंडो जनजाति में हिमोग्लोबिन की कमी के मद्देनजऱ सभी आवश्यक दवायें सप्लाई करने के निर्देश दिये जा चुके हैं। भाजपा शौक से अपनी जांच समिति गठित करके भेज सकती है, वैसे भाजपा को ये जांच समिति अपनी सरकार के समय गठित करनी थी और उनकी सुध लेनी चाहिये थी। अब वहा जाकर घडिय़ाली आंसू बहाना सिर्फ और सिर्फ भाजपा की डर्टी पालिटिक्स है और कुछ नहीं।

 

#Markam

Source : Agency

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