वैज्ञानिक चेतना से ही धर्मान्धता खत्म होगी : दिग्विजय सिंह
अमिताभ पाण्डेय
भोपाल। ( अपनी खबर )
अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस के 17 वें अधिवेशन का आज भोपाल में समापन हो गया। इसमें आज सामाजिक सरोकार से जुड़े राष्ट्रीय विषयों के साथ ही मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विकास पर भी चर्चा की गई।
इस बारे में कार्यक्रम से जुड़े सचिन श्रीवास्तव और राजू नीरा ने अपनी खबर को बताया कि स्थानीय एक्सटॉल कॉलेज में आयोजित की जा रही जन विज्ञान कांग्रेस में 4 दिन तक विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। आखिरी सत्र में अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नई समिति भी गठित की गई।
आज के समापन सत्र में नाल्सर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के कुलपति एवं संविधान विशेषज्ञ प्रो. फैजान मुस्तफा, शिक्षाविद प्रो. आर. रामानुजम, आयशर पुणे के वैज्ञानिक प्रो. सत्यजीत रथ, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनाझारिया मिंज और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वक्तव्य दिए।
इस अवसर पर विज्ञान एवं संविधान से जुड़ी विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया गया। अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नई कार्यकारिणी की घोषणा एवं वैज्ञानिक चेतना के लिए समाज में काम करने के संकल्प के साथ आयोजन का समापन किया गया।
समापन अवसर पर अपने संबोधन में फैज़ान मुस्तफा ने कहा कि कानून का मतलब न्याय होता है, लेकिन कानून के केन्द्र में निहित शक्ति हो गई है। आज स्थिति यह है कि लोगों के लिए न्याय क्या है ? यह बताना मुश्किल हो गया है। दुख यश है कि हमें अपने आसपास होनेवाला अन्याय भी नहीं दिख रहा है।
किसी के साथ हो रहे अन्याय को देखकर हम विचलित क्यों नहीं हो रहे हैं?
यदि ऐसा नहीं हो रहा है, तो मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी दी हुई है।
इसका साफ मतलब है कि व्यक्ति के दिल में जो कुछ भी है, उसे बोलने दिया जाए। जो समाज बोलने से रोकता है, वह आगे नहीं बढ़ सकता। यदि जनता की सहमति से सरकार है, तो जनता की भागीदारी सरकार की नीतियों पर बोलकर ही हो सकती है। यह प्रशंसा के रूप में भी हो सकता है या फिर आलोचना के रूप में। उन्होंने कहा कि देश में वैज्ञानिक चेतना के बिना देश को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। देश में नफरती भाषणों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की जरूरत है। आज देश में धर्म, सत्ता और कार्पोरेट का गठजोड़ है, यदि हम इसे समझ जाएंगे, तो संभव है कि कुछ बेहतर कर पाएं।
आयोजन में अपने विचार प्रकट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा आज जो देश में धर्मान्धता फैली है, उसे वैज्ञानिक चेतना से खत्म किया जा सकता है। वैज्ञानिक चेतना के लिए जन विज्ञान आंदोलन से जुड़े लोगों को सामूहिक रूप से आगे आकर काम करना होगा। शिक्षाविद प्रो. आर. रामानुजम ने कहा कि आज जनता डेटा बन गई है। हमें तकनीक के सही इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनाझारिया मिंज ने कहा कि समाज के उन आयामों की पहचान की जाए, जहां वैज्ञानिक चेतना में कमी है और फिर हमें उन क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।
मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विकास पर बात करते हुए डॉ. योगेश कुमार, सचिन जैन, राजेन्द्र कोठारी, संदीप दीक्षित सहित कई वक्ताओं ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन इसके बावजदू स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार में प्रदेश पिछड़ा हुआ है।
समापन के अवसर पर अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। इसमें अध्यक्ष के रूप में आयसर पुणे के वैज्ञानिक प्रो. सत्यजीत रथ को नियुक्त किया गया। मध्यप्रदेश भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आशा मिश्रा को महासचिव एवं मध्यप्रदेश विज्ञान सभा के एस.आर. आजाद को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
इस आयोजन में शामिल सभी लोगों ने यह संकल्प लिया गया कि आने वाले दिनों में देश में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार को लेकर कार्यक्रम बनाए जाएंगे।

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