Monday, June 15th, 2026

भोपाल का आदमपुर खंती मॉडल बना मिसाल, 54 दिन में साफ हुआ 92 हजार टन कचरा; 330 दिन में खत्म होगा कचरे का पहाड़

भोपाल
राजधानी भोपाल को सालों पुराने बदबूदार कचरे के पहाड़ से मुक्ति मिलने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में वर्षों से जमा 'लिगेसी वेस्ट' (पुराने कचरे) का नामोनिशान मिटाने के लिए नगर निगम का महा-अभियान फुल स्पीड में चल रहा है।

महज 54 दिनों के भीतर हाईटेक मशीनों ने 92 हजार टन (करीब 14 प्रतिशत) कचरे को प्रोसेस कर पूरी तरह खत्म कर दिया है।

हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बीच एक वैश्विक संकट ने भोपाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगा दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कचरे से कोयला बनाने वाले देश के दूसरे सबसे बड़े प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्स) अटक गए हैं।

लेगेसी वेस्ट की प्रोसेसिंग का काम 22 अप्रैल से शुरू किया गया था। इसके लिए दो हाईटेक मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं। बज्र-250 मशीन हर घंटे 250 टन और बज्र-300 मशीन हर घंटे 300 टन कचरा प्रोसेस कर रही है। दूसरी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया था। पूरी साइट को 330 दिनों के भीतर साफ करना अनिवार्य है। इसमें बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

330 दिन में पूरी साइट साफ करने की शर्त...

    पूरे 6 लाख टन से ज्यादा लेगेसी वेस्ट का निष्पादन 330 दिनों में करना होगा।
    बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

    तय समय में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर जुर्माना लगेगा।

    कचरा निष्पादन, साइट सुरक्षा, आग रोकथाम और धुआं नियंत्रण की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

    खंती में आग लगने या नियंत्रण नहीं होने पर 10 लाख रुपए प्रतिदिन की पेनल्टी तय है।

ईरान-अमेरिकी तनाव से अटका कचरे से कोयला बनाने वाला प्लांट भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो गया है। आदमपुर खंती में लगे इस प्लांट के ट्रायल में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है। नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की टीम ने प्लांट के कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए ओके रिपोर्ट दे दी है।

इस कोयले का उपयोग बिजली संयंत्रों में होगा। यह देश का दूसरा टोरीफाइड चारकोल प्लांट है। हालांकि, ईरान-अमेरिकी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्ट्स) नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण प्लांट को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का मामला अटका हुआ है।

हर घंटे 550 टन कचरे का खात्मा; दिन-रात चल रही हैं दो 'दानवाकार' मशीनें
आदमपुर खंती में कुल 6 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा जमा है। इसे खत्म करने के लिए नगर निगम ने कंपनी को 330 दिनों की सख्त समय-सीमा दी है। कचरा निष्पादन का यह काम 22 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसमें दो अत्याधुनिक मशीनें दिन-रात जुटी हैं:

बज़-250 मशीन: यह मशीन हर घंटे 250 टन कचरे को प्रोसेस कर रही है (22 अप्रैल से चालू)।

बज़-300 मशीन: इस दूसरी बड़ी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया, जो हर घंटे 300 टन कचरा साफ करती है।

नो वेकेशन इन मानसून: इस बार मानसून और बारिश के सीजन को भी 'वर्किंग डेज' में शामिल किया गया है, यानी बारिश में भी काम नहीं रुकेगा।

330 दिन में साइट साफ करने की शर्तें... नहीं तो ₹10 लाख प्रतिदिन का जुर्माना

नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी के सामने बेहद कड़े नियम और पेनाल्टी की शर्तें रखी हैं।

- तय समय (330 दिन) में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा।

- कचरा निष्पादन, साइट की सुरक्षा, आग की रोकथाम और धुएं पर नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

- खंती में आग लगने या उस पर तुरंत नियंत्रण नहीं होने की स्थिति में कंपनी पर 10 लाख रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी (जुर्माना) तय की गई है।

कचरे से बनेगा कोयला, लेकिन इंटरनेशनल टेंशन से अटका फुल-ऑपरेशन
कचरे के पहाड़ को खत्म करने के साथ ही भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में लगे इस विशेष प्लांट के ट्रायल रन में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है।

देश के इस दूसरे टोरीफाइड चारकोल प्लांट की नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की टीम ने भी जांच की है और कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए अपनी 'ओके रिपोर्ट' दे दी है। इस कोयले का उपयोग देश के बड़े बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में होगा।

पुर्जों का इंतजार: यह प्लांट भोपाल के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से इस प्लांट के कुछ बेहद अहम टेक्निकल पार्ट्स (पुर्जे) भारत नहीं आ पा रहे हैं। यही वजह है कि कोयला बनाने का यह प्लांट अभी तक अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं हो पाया है।

 

 

#Aadampur

Source : Agency

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