Friday, October 23rd, 2026

बस्तर की कला-संस्कृति के संरक्षण का केन्द्र होगा बादल

रायपुर
बस्तर अकादमी आॅफ डांस, आर्ट, लिटरेचर एण्ड लेंग्वेज (बादल) बस्तर एवं आदिवासियों की कला, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण केन्द्र बनेगा। इसकी स्थापना को लेकर आज जगदलपुर शहर के समीपस्थ ग्राम आसना में निर्मित बादल परिसर में आदिवासी समाज के प्रमुखों तथा कला, साहित्य एवं संस्कृति जगत से जुड़े लोगों की बैठक हुई।

बस्तर में आदिवासी समाज के धुरवा, भतरी एवं गोंडी आदि बोलियां विलुप्त होने के कगार पर है। इन बोलियों का संरक्षण एवं संवर्धन करना बादल के प्रमुख कार्यों में शामिल है। बैठक में उपस्थित सामाजिक प्रतिनिधियों से अपने-अपने समाज के भाषा के अलावा लोक कला एवं लोक गीत तथा नृत्य की जानकारी का अभिलेखीकरण कराए जाने और संस्थान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भागीदारी सुनिश्चित करने के अपील की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि बस्तर संभाग के 40 प्रकार के परम्परागत लोक गीतों के संकलन का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। बादल संस्थान से संबंधित अधोसंरचना विकास के लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरे हो गए हैं।

 

#Badal

Source : Agency

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